प्रवाह!

लेखन सहजता से ही हो पाता है!
आप जब विश्रांति में होते है तभी कुछ लिख पाते है!
कई दिनों से या ये कहिये महीनों बाद थोड़ी सी विश्रांति मिली मुझे।
आगे.....
अब शायद लेखन अनवरत चले कुछ दिनों तक।

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