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Showing posts from 2021

विरह वेदना! लड़कियों की!

 प्रेम में ठुकराई गई लड़कियां  लड़कों की तरह नही पीती दारू  नही बकती गालियां  नही निकालती भड़ास  नही करती किसी को बदनाम वो बस चुपचाप सिमट जाया करती है अपनी आत्मा के गहरे उदास समुच्चय में! प्रेम में ठुकराई लड़कियां करती है घर के सारे काम अनवरत जैसे पृथ्वी घूमती है अपने अक्ष पर रहती है साथ में घर से निर्लिप्त व निरपेक्ष! अगर भूल से भी माँ सिर पे हाथ फैर दे तो फूट पड़ती है रुलाई और बना देती है कोई बहाना! प्रेम में ठुकराई लड़कियां भीग जाने के डर से नही लगाती आंखों में काजल! उनके दिल की गिरहों की तरह उलझे रहते हैं उनके बाल! रात को सोते वक़्त भिगोती है तकिया! कचोटती है अपनी आत्मा को नजरअंदाज करती है अपने जिस्म पे पड़ी छल की निशानियों को नफ़रत करती है अपने जिस्म के उभारों से! नही कर पाती फिर जीवन भर भरोसा प्रेम नामक चिड़िया पर! प्रेम में ठुकराई लड़कियां झेलती है चन्द्रमुखी सी आत्मप्रवंचना! सहती है राधा व मीरा सा विरह! बड़ी अजीब सी होती है ये प्रेम में ठुकराई गई व छली गई लड़कियां,,,!!

समाधि ऐट 28 प्रकाशोत्सव!

१-जैसा कि इस लेख के शीर्षक को ध्यानपूर्वक पढ़ने पर आप अनुमान लगा ही चुके होंगे!!  जी हाँ ये मेरी आत्मकथा का एक अंश हो सकता है। २-किंनुभार, ढकवा बाज़ार, पुलिस स्टेशन-सिकरीगंज जनपद गोरखपुर एवं अम्बेडकर नगर के दक्षिणी-उत्तरी संयोग(श्रीरामजानकी मार्ग) कुँवानो नदी के तट पर स्थित है। जहाँ श्री लालमणि दूबे एवं माँ आरती देवी के आपसी संयोग के कारण मेरा उद्भवम जन्म नवम्बर मास के(इशवी सन १९९३) २८ तारीख प्रातः ३:०० को हुआ।

महामानवी!!

हे रजनी हे-हे! रजनी तुम हो जीवन की इक जननी तुमसे मिलकर मैं जीवन वृहता को जान सका।। पहचान हुई मेरी खुदसे मैं लघुता से प्रस्थान किया विस्तृत इस जग की सुंदरता को अपने भीतर स्थान दिया।। मैं नितप्रति पल बस ये सोचू अब तुम हो इक दिव्यकिर्ति... मेरी ऊर्जा का ये प्रवाह तुमको पल भर में.. देखना तुम...चंद्रशेखर की शिखा से गंगा की धार निकाल... इस जग की अधूरी प्यास को.... संतृप्त करेगा, औऱ स्मित ये तुम्हारा मोहन को राधिका का दीवाना बनाकर इक मधुर तान जब छेड़ेगा।। जग इक लय में लयबद्ध हुआ.... तुमने ये किसलय कर ही दिया। तुमने खुद को विस्तीर्ण किया।। ब्रह्माण्ड धरा पर परिलक्षित किया।।

विद्यालय एवं कारावास

क्या विद्यालय और कारावास एक तरह के संस्थान हैं? यह प्रश्न विचारणीय है और इसपर विचार निम्नवत है। विद्यालय एक संस्थान है जहाँ बालक को सर्वसम्मति से भेजा जाता है। हाँ कुछ मामलों में प्रारंभ में नौनिहालों में यहाँ से जल्दी भाग जाने की प्रवृत्ति होती है किंतु ये प्रवृत्ति समय बीतने पर कम से कमतर होकर लगभग समाप्त हो जाती है। और अब बच्चों का सामाजीकरण प्रारंभ होता है,उसके कुछ मित्र बनते हैं और कुछ बच्चे उनके लिये शत्रु प्रतीत होते हैं किंतु समय बीतने के बाद उचित शिक्षा, मार्गदर्शन एवं सामाजीकरण के उपरांत ये शत्रुता भी समाप्त हो जाती है। विद्यालय में बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने का निरंतर प्रयत्न होता रहता है जो काफी हद तक सफल भी होता है। विद्यालय का मूल मंत्र "शिक्षार्थ आइये सेवार्थ जाइये" होता है। समाज मे शतप्रतिशत तो नही किंतु एक आध प्रतिशत को छोड़कर लगभग सबका जाना हुआ है, होता है एवं होता रहेगा। विद्यालय समाज एवं समुदाय के चहुमुखी विकास में महती भूमिका निर्वहित करता है। विद्यालय में जाना एक शुभ अवसर होता है। दूसरी तरफ कारावास एक दण्ड के विधानस्वरूप सृजित संस्थान है। कारावास का ...

पण्डित जवाहरलाल नेहरू!

मैत्री!

मैत्री एक भाव है ये भाव जिसने भी अपने अंदर विकसित किया वो सम्राटों का सम्राट होगा। जैसे जैसे आप मैत्री पर ध्यान देंगे और आपका ध्यान घनीभूत होगा आप सम्राट से महा सम्राट,चक्रवर्ती सम्राट बनने की तरफ भी घनीभूत है। ये ही विजय का सूत्र है। आपके भाव,विचार,स्थूल शरीर,सूक्ष्म शरीर एवं आस पड़ोस में सबको मित्र बनाइये, मित्र बनाने से ज्यादा मैत्री विकसित करिये। मैत्री को ही सूत्र बनाइये। एक दिन इस यात्रा में किसी भी क्षण जब मैत्री घनीभूत होकर पराकाष्ठा पर पहुँचेगी बस उसी बिंदु पर आप 'मैत्रेय' हो जाएंगे। पृथ्वी का अगला सम्राट मैत्रेय का उदय होने ही वाला है। आप के या मेरे या किसी के भी भीतर।

लक्ष्य!..एक यात्रा!

बचपन से जूनूनी था मैं,कक्षा ८ वीं तक कोई लक्ष्य क्या होता है इससे अनजान था, मेरा ज्यादातर समय क्रिकेट खेलने और गाँव के बच्चों के साथ शरारतें करने में ही बीतता था,परिवार में पढ़ाई के प्रति विशेष दृष्टिकोण थे सबके, इसलिए थोड़ा बहुत पढ़ भी लिया करते थे। फिर ९ वीं में दो महान गुरुजन मिले उनके मार्गदर्शन से मेरा जूनून अध्ययन की तरफ एकाग्रचित्त हुआ। और फिर शानदार परिणाम भी प्राप्त हुए। मुझे याद है जब भी मैं अपनी दादी के लिये कुछ अच्छा करता तो दादी आशीर्वाद देती "जज कलक्टर बन जा! बाबू"  फिर पिता जी ने बातों बातों में मुझे समझाया कि विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिये १२ वी के बाद आई आई टी की परीक्षा उत्तीर्ण करना सबसे सम्मान जनक होता है। उसके बाद मैं दादी से अर्थात माई से कहता कि अब मुझे इंजीनियर बनने का आशीर्वाद दो! फ़िर दादी मुझे " बड़का इंजीनियर बन जा बाबू" हमेशा यही आशीर्वाद देती! फिर दादी का निधन हो गया। और मैं गोरखपुर शहर में आ गया गाँव से। अब मैं इंजीनियरिंग की पढाई के पीछे पड़ा रहता था। मेरे श्रेष्ठ मार्गदर्शक गण भी अंदर ही अंदर महसूस करते मैं बड़ा इंजीनियर बनूँगा! १२ व...

अयोध्या के सन्त

एक सन्त के घर जाना हुआ था मेरा बातों ही बातों में उन्होंने कहा कि मेरा सारा कार्य होता जाता है मैं कुछ करता नही हूँ। ये उस वक़्त मेरे लिये आश्चर्य भरा था।

भाग्या एक निष्कर्ष!

तेजस आज अचानक परिवर्तित हो चुका है, वो ये गहराई तक समझ चुका है कि उसे अब मुक्ति मिल चुकी है। अदिति से अचानक वो मुक्त हो गया। ये एहसास अभी तेजस के हृदय से रोम-रोम में संचरित हो रहा है। अदिति उसके जीवन यात्रा में एक ऐसा मील का पत्थर रही जिसके बाद उसके रास्ते बिल्कुल परिवर्तित हो चुके थे। वे दोनों कॉलेज से साथ पढ़े। अदिति का तो पता नही लेकिन तेजस धीरे-धीरे समर्पित होता जा रहा था। उसे अदिति में बहुत ज्यादा विशेष दिखता था। तेजस बहुत ही शांत स्वभाव का लड़का था। लड़कियों से हमेशा-से दूर रहने वाला एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से उभर कर शहर आया हुआ लड़का जिसे शहर की ज्यादातर चीजें अचरज में डाल देती थी। तेजस क्लास में कभी अदिति से बात नही किया,डर या संकोच कुछ भी हो या शायद दोनों हो। पढ़ाई में अच्छा था तेजस मेहनती विद्यार्थियों में से एक था,कुछ अध्यापकों एवं सहपाठियों को वो प्रतिभाशाली लगता था लेकिन मूलतः उसके प्रतिभा में लगन और परिश्रम का समावेश था। तेजस की कुल प्रेम कहानी में बात इतनी थी कि वो क्लास में सबसे छूप के कभी कभी अदिति को क्षण भर के लिये देख भर लेता था,और क्लास ओवर होते समय रास्ते मे अदिति को साइक...

धनी बनने के सूत्र!

क्या आप गरीब है? यदि आपका उत्तर हां है तो पुनः एक प्रश्न-क्या आप अमीर होना चाहते हैं? यदि आप इन दोनों प्रश्नों के उत्तर से संतुष्ट होना चाहते हैं तो ये लेख आपके लिये है। अहोभाव प्रकट करना जी हां अहोभावित होना ही धनी बनने का प्रथम सूत्र है। शिकायत के समस्त भावों से मुक्त होइये,छोटी से छोटी एवं बड़ी से बड़ी सभी शिकायतों का त्याग आपको अमीर बना देगा। बदले में आप अहोभावित होइये जो भी आपके पास है,जैसे स्वस्थ शरीर,अच्छी स्वांस इत्यादि या फिर आपका परिवेश जो भी आपको मिला है ईश्वर की तरफ से अपने अंग-अंग रोम-रोम को धन्यवाद के भावों से भरिये!  ये कठिन है किंतु असाध्य नही। आहिस्ता-आहिस्ता अभ्यास करने से आप इसमें परिपक्व हो जाएंगे! और जिस क्षण इसमें पूर्ण हुए आप!  मुबारक हो आप अमीर बन गए! संसाधनों पे डेडिकेटेड होना! अर्थात जितने भी संसाधन हैं आपके पास प्रथमतया उन पर अपना शतप्रतिशत समय और समर्पण दीजिये। धीरे-धीरे आपके वही संसाधन घनीभूत एवं पवित्र होते जाएंगे और आपकी स्किल भी बेहतर होती जाएगी। ये कही भी किसी भी क्षेत्र में सम्भव है। धनवान एवं समृद्ध व्यक्ति विनम्रतापूर्वक समाधान पर ध्यान देते ह...

अनाम यात्रा रहस्य..१

रवींद्रनाथ जी के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है। एक साधक या ईश्वर-प्रेमी ईश्वर को बहुत तल्लीन होकर ढूंढता है; एक दिन अचानक वो ईश्वर के घर पहुंच जाता है; दरवाजे पर दस्तक देने ही वाला होता है। उसके और ईश्वर के बीच बस एक खटखटाहट! किन्तु वो दरवाजा खटखटाया ही नही,वापस लौट आया। ये छोटी कहानी बहुत सार लिये हुए है। बौद्धों का बोधिसत्व भी बिलकुल इसी तरह हैं। विवेकानंद की ज्ञानप्राप्ति के उपरांत भी पुनर्जन्म की इच्छा भी बिलकुल यही है। ये मेरे साथ भी हुआ,मैंने जिसको पूजा,जिसकी चाह बड़ी सिद्दत से की। उसे पाकर या पाने का अधिकारी होकर भी उसे त्याग दिया। ये वास्तविक क्रांति है जीवन की जो अनुभूत हुई... शायद इस कहानी से ये रहस्य खुल जाए..किन्तु नही अब वास्तविक रहस्य तो मैं समझा ही नही सकता किसी को,आपको भी नही। बस इशारा कर सकता हूँ,श्रम आपको करना होगा।

अनाम यात्रा रहस्य!

तुम्हें लिखूँ या त्याग दूँ, त्यागना तो मुश्किल है फिलहाल। 13 वर्ष हो गए जबसे मैं आपको जानता हूँ। इन वर्षों में कभी भी वासना की एक बूँद भी निर्मित नही हुई। मात्र प्रेम,मात्र साहचर्य, मात्र समर्पण। भोर का सूर्य रजनी में नहाकर निकलर ही प्रभाकर होता है। ये मेरे लिये मीमांसा है,आपका साथ दर्शन है एक अन्यत्र जगत का। ये साथ मुझे मुझसे मिलाकर मुझसे मुझको ही छीन लिया। क्यों,आखिर क्यों ये अभी भी अज्ञात है,हाँ किन्तु एक किरण है जो अत्याज्या आध्यात्मिक है..जो मुझे,मेरी आत्मा को मजबूर करती है इस पथ पर चलने को। मैं स्वयं को ही पुनरुक्त करने की कोशिश करता हूँ कि आखिर इतना बड़ा अचरज हो कैसे रहा है। क्या हमारा पुनर्जन्म हुआ है। या कुछ शेष रहा जिसे अशेष होना है। क्या आप माँ शारदा हैं। इस कहानी का आदि कहा हैं,हम मध्य मे मिले या हमारा आदि मिलन हुआ इत्यादि सैकड़ों प्रश्न। मैं खुद को ढूंढ रहा हूँ,मैं  खुद ही खुद को नही रोक पाता, क्या आप जादूगर हैं... अक्सर इन बातों का उत्तर मस्तिष्क देने में असमर्थ हो जाता है। सिर भारी हो जाता है। हाँ, आत्मा बिलकुल सहज उत्तर दे देती है। फिर भी आखिर क्यों, क्यों और क्यों......

तालिबान!

तालिबान का अर्थ ज्ञानार्थी होता! धिक्कार है ऐसे ज्ञानार्थियों पर! किन्तु यहाँ एक चीज है जो नवनीत है! जब ये जाहिल अपनी जाहिलियत से मात्र इनके आराध्य अल्लाह को स्वीकार करके विश्व में तांडव मचाने का ख्वाब पाल कर पूरे विश्व विजय की कामना करते हैं! तो क्या हम इनके विपरीत एक शान्ति एवं सद्भाव से युक्त विश्व के विषय में नही सोच सकते! मैं ये मानता हूँ कि इसके लिये हममे ज्यादा सामर्थ्य एवं धैर्यवान एवं सार्वभौमिक धर्म को विकसित करने की जरुरत है।

Dividend..लाभांश!

The date is 13-08-2021 I got my first dividends from Itc! Feeling nice! इस दिन के एक दिन बाद 14 अगस्त को मुझे ये ज्ञात हुआ कि मैं अपनी चैतन्य यात्रा के बेहद निकट जा चुका हूँ! जहाँ मुझे बचपन वाले स्वप्न के भेद तो खुलते नजर नही आये किन्तु वही स्वप्न वही आग वही भवन का जलना मैं स्पष्ट रूप से पुनः देख पाया और जब मैं जगा तो मुझे ज्ञात हुआ कि मैं ITC का लाभांश ₹104 भी प्राप्त कर चुका हूँ एक रोज पहले! अब मुझे प्रतीत होता है कि एक जन्मजात फोड़े की सम्पूर्ण मवाद बह सकती है। किंतु यहाँ मैं कुछ नही करूँगा बस द्रष्टा बना रहूंगा! ये लेख मात्र मेरी स्मृति के लिये है।

सम्यक व्यक्तित्व!..३

१-जीवन के किसी भी मोड़ पर किसी भी अच्छे विचार या तथ्य के विरुद्ध कभी भी कोई बहस नही करना चाहिए। इससे आपका व्यक्तित्व दूषित तथा मन दुःखी ही होगा। २-साईकल चलाने का अभ्यास करें एवं जब आवश्यक हो तभी किसी डीजल,पेट्रोल या अन्य ईंधन से चलने वाले वाहन का प्रयोग करें। इससे आपके धन एवं वक़्त दोनों की बचत होगी तथा स्वास्थ्य में बेहतरीन सुधार होगा।आपको जिम जाने की जरूरत नही पड़ेगी एवं पर्यावरण भी शुद्ध होगा। ३-आपके जीवन को संवारने एवं समृद्ध करने के लिये वो सलाह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है जो आप समान परिस्थितियों में किसी अन्य प्रिय व्यक्ति को देते हैं।

सम्यक व्यक्तित्व!...२

१-सुंदर आपकी देंह, चेहरा इत्यादि नही होता है। सुंदर होता है सत्य! सत्य परम सुंदर है,सत्य छोटे-छोटे अभ्यास से प्रारंभ होकर एक विस्तीर्ण रूप धारण करता है जो बहुत मधुर एवं मनोहर होता है। यदि आप सत्य का पालन कर रहे हैं तो आपको धर्म का मार्ग मिलेगा जहां आपको शांति एवं सुकून दोनों मिलेगा एवं आप निरन्तर नूतनता के बोध से जागृति के मार्ग पर अग्रसर होकर इस संसार से मुक्त होकर परमधाम को जायेंगे। २-यदि आप किसी समुदाय, समाज,राष्ट्र या विश्व में कहीं भी निवास कर रहे हैं तो आपको किसी भी ऐसे आचरण को धारण नही करना चाहिये जिससे आप बहुसंख्यक समूह के सद्चरित्र लोगों पर बोझ बने! आपको अपने आचरण से सदैव एक सुगंध प्रसारित करके शांति,सन्तोष एवं प्रेम की स्थापना करने का भरसक प्रयत्न करना चाहिए। ३-आपको प्रकृति के प्रति सदा अनुग्रहीत भाव से समर्पित होकर उसके उत्थान एवं समृद्धि में जितना सम्भव हो सहयोग करके इस पृथ्वी को औऱ सुंदर हरा भरा बनाकर ही इस नश्वर शरीर का त्याग करना चाहिए।

सम्यक व्यक्तित्व!..१

१-यदि आप एक उदण्ड व्यक्तित्व के प्रवाह में हैं वर्तमान में तो कभी भी जब आपका व्यवहार एक......सरल,सहज,निश्छल,सहनशील एवं विनम्र व्यक्ति से हो तब आपको अपने व्यवहार से..उस व्यक्ति को उदण्ड होने पे मजबूर नही करना चाहिये। क्योंकि आप उसकी उदण्डता बर्दाश्त नही कर पायेंगे! २-यदि आपको कोई कष्ट दे रहा है तो अपने कष्टसहन की अंतिम सीमा को विस्तीर्ण करते जाइये एवं प्रत्येक बिन्दु पर अपनी अंतरात्मा से उसको क्षमा करिये एवं उसके प्रति करुणावान बने रहिये। यकीन करिये एक क्रांतिकारी घटना घटेगी और उस घटना को साक्षी भाव से देखिये निष्पक्ष होकर!...आपको परमानंद बोध होगा। ३-यदि आप किसी बच्चे के माता या पिता है तो प्रेमपूर्वक उसका पालन करिये एवं अपने जीवनसाथी से कोई तनाव मत पालिये।आप अपने बच्चे को कुछ मत बनाइये उसे स्वतंत्रतापूर्वक जीवन जीने दीजिये। आपका बच्चा अतिप्रतिभाशाली होकर संसार मे कीर्ति एवं यश को उपलब्ध होगा।

प्रवाह!..

जीवन में अक्सर हम कहते हैं,"हमारे पास पैसा नही! इसलिये हम कोई वस्तु खरीद नही पा रहे हैं!.." तो आप स्वयं को अभिशाप दे रहे हैं!  आप खुद को खुद की मेहनत से ये विश्वास दिलाइये.... आप दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं औऱ जो भी काम दुनिया का सबसे अमीर आदमी व्यक्ति कर सकता है और अधिकारों का प्रयोग करता है या कर सकता है। "उसे आप भी कर सकते हैं।और करेंगे" तो आपको अमीर बनने से कोई नही रोक सकता! सादर "अहिंष्य"

नींद!

 दुनिया की बेहतरीन बातों में एक बात नींद भी है,नींद स्वास्थ्य एवं जीवन के लिये बहुत जरूरी है! जब कभी हम थक जाते है,या चिंतित होते है तब नींद ही वो सहारा है जो हमें सुकून दे जाती है! नींद हमेशा बुरी नही होती।

पुनर्नवा

जज्बातों से घिरा हुआ एक इंसान हूँ मैं,एक ऐसा आदमी जो ख्वाहिशें पाल कर जीता है! दुनिया रूपी रंगमंच पे अभिनय करता हुआ बहुत सारी आशाओं से भरा एक अभिनेता हूँ! मैं बहुत सारी उम्मीदों को पिरोया हुआ हूँ अपनी स्वांसों की माला में! भगवान को बहुत सारा धन्यवाद मुझे काबिल बनाने के लिये!हृदय से अपने वर्तमान को लेकर तसल्ली अभिव्यक्त करता हूँ!मुझे इस पथ पर जिसपर मैं चल रहा हूँ पूरे विश्वास के साथ चलना है! मेरा परिवार और समाज मुझे चाहे जिस नजर से देखे या देखता  हो फ़र्क़ पड़ता है किन्तु अभिव्यक्ति मौन है मेरी! जीवनपथ पे मिलने वाले कुछ मुसाफिरों से सम्मान एवं कुछ से अपमान मिलता रहता है,ये उनका व्यक्तिगत निर्णय है मेरा कोई अधिकार नही कि मैं उसे परिवर्तित करूँ या करने की कोशिश करू! जीवन एक अज्ञात यात्रा है अभी 28 वर्ष पूरे हो रहे है मेरे जीवन के,आगे का सफर भी योगेश्वर श्रीकृष्ण ही मुकम्मल करेंगें! हे न्याय के मालिक तुमसे पुकारता हूँ मैं मुझे कष्ट दो,तक़लीफ़ दो सभी रंग दिखाओ किन्तु मुझे इतना यकीन है कि एक न्याय अभी शेष है! और पूर्ण विश्वास है मुझे कि वो न्याय प्राप्त होगा मुझे!

ज़मीर का दम घुट गया!

 हा धीरे-धीरे मेरे जमीर का दम घुट गया! और मैं गृहस्थ हो गया!

सुसुप्त

 मैं आजकल लिखता नही कारण भी अज्ञात है! चलिये कोशिश करते है कि आखिर क्यों नही लिखता! शायद थकान या विषयवस्तु की कमी जो भी हो! विवाहोपरांत मेरे जीवन मे बहुत कुछ परिवर्तित हो गया! देखिये कब लेखनी होती है एक खास अंदाज में!