विद्यालय एवं कारावास
क्या विद्यालय और कारावास एक तरह के संस्थान हैं? यह प्रश्न विचारणीय है और इसपर विचार निम्नवत है।
विद्यालय एक संस्थान है जहाँ बालक को सर्वसम्मति से भेजा जाता है। हाँ कुछ मामलों में प्रारंभ में नौनिहालों में यहाँ से जल्दी भाग जाने की प्रवृत्ति होती है किंतु ये प्रवृत्ति समय बीतने पर कम से कमतर होकर लगभग समाप्त हो जाती है। और अब बच्चों का सामाजीकरण प्रारंभ होता है,उसके कुछ मित्र बनते हैं और कुछ बच्चे उनके लिये शत्रु प्रतीत होते हैं किंतु समय बीतने के बाद उचित शिक्षा, मार्गदर्शन एवं सामाजीकरण के उपरांत ये शत्रुता भी समाप्त हो जाती है। विद्यालय में बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने का निरंतर प्रयत्न होता रहता है जो काफी हद तक सफल भी होता है। विद्यालय का मूल मंत्र "शिक्षार्थ आइये सेवार्थ जाइये" होता है। समाज मे शतप्रतिशत तो नही किंतु एक आध प्रतिशत को छोड़कर लगभग सबका जाना हुआ है, होता है एवं होता रहेगा।
विद्यालय समाज एवं समुदाय के चहुमुखी विकास में महती भूमिका निर्वहित करता है। विद्यालय में जाना एक शुभ अवसर होता है।
दूसरी तरफ
कारावास एक दण्ड के विधानस्वरूप सृजित संस्थान है। कारावास का सम्बंध अपराध से है। अपराध को कारित करने वाले को दुनिया के लगभग सभी देशों में कारावास में भेजा जाता है। अपराध की प्रवृति के अनुसार कानून कारावास में प्रवास के समय को भी निर्धारित करता है।
कारावास में यथार्थ के अनुभूति के लिये पर्याप्त समय मिलता है। दुनिया की बहुत सारी महान हस्तियों को भी कारावास की दरों-दीवारों से गुजरा हुआ पाया जाता है प्रायः।
Comments