परिचय!

मैं मस्त हवाओं का आज़ाद परिंदा हूँ....
उड़ते-उड़ते उड़ जाऊंगा!
फिर ना मैं वापस आऊँगा........
मर जाऊंगा जीकर जीवन
तृष्णा सारी पी जाऊंगा।।

नीलकंठ जब हो जाऊंगा
विष समस्त! हाँ समस्त!
निगल कर उदर में भी जाने न दूंगा!

उड़ते-उड़ते उड़ जाऊंगा
जख्मों को मरहम न देकर
गहरा जख्म दिये जाऊँगा!
फिर ना मैं वापस आऊँगा!


Comments

वाह!💕 बहुत खूब लिखा है।

Popular posts from this blog

समर्पित प्रेयसी!

आधुनिक अकड़!