प्रार्थना उनके आने की!

खुली छत,और अंधेरी रात
तारों को टुकटुक देखता मैं
नितांत अकेला इस जीवन-सफर
में....तुम भी आओ ना।

इंतजार कर रही रूह मेरी
तुम्हारे रूह की..इस रूह
की प्यास बुझाओ ना।

अकेला ही सफर तय है हालांकि
फिर भी कुछ पल के लिये ही
मेरी रूह से तुम्हारे रूह को
मिलाओ ना। आओ ना...

या मौला मेरे शब्दों में
इतनी ताकत दे,जो उन्हें छू सके
उनकी प्रशांत चेतना को जगा सके।

मैं मुकम्मल नही हूँ उनके बगैर
उनका साथ मयस्सर करा दे
मौला... फिर तू भी मुकम्मल और
मैं भी मुकम्मल!




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