काफिला-ए-कृष्ण!
कोई मीरा,कोई राधा!
हज़ारों गोपियाँ तरसें..
हज़ारों ख्वाब है जलते...
लगी है आग बस विरह की
मगर नही रुकेगा कि
ये कृष्ण का है काफ़िला...
है कृष्ण का ये काफिला!
अहिंष्य!
हज़ारों गोपियाँ तरसें..
हज़ारों ख्वाब है जलते...
लगी है आग बस विरह की
मगर नही रुकेगा कि
ये कृष्ण का है काफ़िला...
है कृष्ण का ये काफिला!
अहिंष्य!
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"ये कृष्ण का है काफिला।"