निठल्ला!

मुझे मत याद करिये
मैं निठल्ला हूँ...
नींद बड़े तप के बाद मयस्सर होती है।

नींद से क्यों प्रेम है मुझे
नींद मृत्यु-सी है
सवेरा जन्म जैसा है।

यूँ तो दर-दर की ठोकरें
आहिस्ता-आहिस्ता मुझे मुकम्मल
करती जा रही हैं।

कभी-कभी चिंतित होता हूं
आप मेरा साथ निभा पाएंगी की नही...
क्योंकि कइयो ने निभाने का स्वांग रचा कर
मुझे परित्यक्त कर दिया।

फिर भी मेरा निठल्लापन मुझे
अच्छा लगता है...लोगों का परित्याग
सम्बन्धियो से लेकर अजनबी तक,
मुझे एक विशिष्ट जहां में लेकर गया
जो आँखे बंद करने से खुलता है।

इसलिये हे प्रिय,प्रिया
अर्धांगिनी बनने के पूर्व हज़ार बार विचार कर लीजिएगा!

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