ख़त..७

बहुत ज्यादा मेरा रोम-रोम आपसे मिलने को आतुर हो रहा है।
ये जानते हुए की अब मेरे नसीब में आपका साथ नही।इसके बावजूद आपके उत्पत्ति दिवस की असीम शुभकामनाएं।
अब आपके भाग्य का सूर्योदय हो चुका है।प्रिय पत्थर!

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