चन्द्र का पत्र
चंद्र का पत्र सूर्य के नाम।
स्थान:सौरमंडल
समय:रात्रि
मेरे प्यारे मित्र सूर्य,तुम्हारी बहुत याद आती है।मैं यहां आकाश में अपने समस्त तारागणों संग अत्यंत खुश हूं और आशा करता हूँ कि तुम भी सपरिवार अत्यंत खुश एवम स्वस्थ होंगे।
मुझे याद है वो दिन जब मैं पृथ्वी बहन से रूठकर स्वयम को बर्बाद करने निकाला था और अपने जीवन के अंधेरों में खो गया था।तब तुमने ही मुझे अपनी मेहनत से कमाए हुए प्रकाश में से उधार देकर मेरी सहायता की और मुझे मेरी कक्षा में पहुँचाकर मुझे आजीवन अपना ऋणी बना लिया।इसके पश्चात तुम्हारे द्वारा ही मुझे यह चंद्र नाम प्राप्त हुआ जिसके माध्यम से इस सौरमंडल में मुझे भी अस्तित्व मिला।
मेरे प्यारे मित्र ,मैं सदैव आपके दर्शनों के लिए लालायित रहता हूँ।किन्तु मेरा job schedules कुछ ऐसा हो गया है कि जब मैं आपसे मिलने आता हूँ तब तक आप जा चुके होते हो।पृथ्वी बहन से बात होती है और उन्ही के माध्यम से आपका सुसमाचार मिलता रहता है।वे बताती हैं कि आजकल आप तन्हा रहना पसंद करते हैं और बात बात पर गर्म हो जाया करते हैं।रात में भी आप सिर्फ अपने साथी तारों साइरस और प्रोक्सीमा सेंचुरी से ही बात करते हो।आपको पता होना चाहिए कि ये दोनों तारे आपके करीबी होने का ढोंग करते हैं और षड्यंत्र करके आप से सौर मंडल हड़पना चाहते हैं।मुझे ये सब इसलिए पता है क्योंकि ये दोनों मेरे साथ मेरी ही शिफ्ट में काम करते हैं और झिलमिलाकर सबकी खिल्ली उड़ाया करते हैं।
आपकी एक बात मुझे बहुत ही बुरी लगी कि आप इन तारों से मिलने आ सकते हो लेकिन अपने चंद्र से नही।क्या चंद्र कुछ नही है आपके लिए?मुझे पता है कि यह पत्र पढ़ने के पश्चात आप अपने चिर परिचित अंदाज़ में क्षमा मांग लेंगे लेकिन आपको ये भी मालूम होना चाहिए कि मैंने भी आपको देखा था छत से इन तारों को निहारते हुए और मेरी उपस्थिति को नकारते हुए।फिर भी मैं माफ करता हूँ इसके लिए आपको क्योंकि आपने जान बूझकर ऐसा नही किया होगा।
रही बात तन्हा रहने की तो उसके लिए मैं निश्चिंत हूँ क्योंकि जिस सूर्य ने मुझ भ्रमित को मेरा पथ दिखलाया है वह अपनी तन्हाई को भी शीघ्र ही बाहर का रास्ता दिखा देगा।आपको पता होना चाहिए कि मैं और अन्य सभी ग्रह उपग्रह आपसे उधार लिए गए प्रकाश के ब्याज से ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं अतः आपका इस प्रकार आत्म दग्ध रहना हम मासूमों के लिए किसी भी प्रकार वांछनीय नही होगा।मेरी इस बात पर गौर अवश्य फरमाइयेगा।
ज्यादा क्या लिखूं,बस रात्रि में आपकी प्रतीक्षा रहेगी।आपकी और अपनी बचपन की फ़ोटो भी भेज रहा हूँ।
आपको खुश एवम स्वस्थ देखने की अभिलाषा के साथ ।
आपका चंद्र
स्थान:सौरमंडल
समय:रात्रि
मेरे प्यारे मित्र सूर्य,तुम्हारी बहुत याद आती है।मैं यहां आकाश में अपने समस्त तारागणों संग अत्यंत खुश हूं और आशा करता हूँ कि तुम भी सपरिवार अत्यंत खुश एवम स्वस्थ होंगे।
मुझे याद है वो दिन जब मैं पृथ्वी बहन से रूठकर स्वयम को बर्बाद करने निकाला था और अपने जीवन के अंधेरों में खो गया था।तब तुमने ही मुझे अपनी मेहनत से कमाए हुए प्रकाश में से उधार देकर मेरी सहायता की और मुझे मेरी कक्षा में पहुँचाकर मुझे आजीवन अपना ऋणी बना लिया।इसके पश्चात तुम्हारे द्वारा ही मुझे यह चंद्र नाम प्राप्त हुआ जिसके माध्यम से इस सौरमंडल में मुझे भी अस्तित्व मिला।
मेरे प्यारे मित्र ,मैं सदैव आपके दर्शनों के लिए लालायित रहता हूँ।किन्तु मेरा job schedules कुछ ऐसा हो गया है कि जब मैं आपसे मिलने आता हूँ तब तक आप जा चुके होते हो।पृथ्वी बहन से बात होती है और उन्ही के माध्यम से आपका सुसमाचार मिलता रहता है।वे बताती हैं कि आजकल आप तन्हा रहना पसंद करते हैं और बात बात पर गर्म हो जाया करते हैं।रात में भी आप सिर्फ अपने साथी तारों साइरस और प्रोक्सीमा सेंचुरी से ही बात करते हो।आपको पता होना चाहिए कि ये दोनों तारे आपके करीबी होने का ढोंग करते हैं और षड्यंत्र करके आप से सौर मंडल हड़पना चाहते हैं।मुझे ये सब इसलिए पता है क्योंकि ये दोनों मेरे साथ मेरी ही शिफ्ट में काम करते हैं और झिलमिलाकर सबकी खिल्ली उड़ाया करते हैं।
आपकी एक बात मुझे बहुत ही बुरी लगी कि आप इन तारों से मिलने आ सकते हो लेकिन अपने चंद्र से नही।क्या चंद्र कुछ नही है आपके लिए?मुझे पता है कि यह पत्र पढ़ने के पश्चात आप अपने चिर परिचित अंदाज़ में क्षमा मांग लेंगे लेकिन आपको ये भी मालूम होना चाहिए कि मैंने भी आपको देखा था छत से इन तारों को निहारते हुए और मेरी उपस्थिति को नकारते हुए।फिर भी मैं माफ करता हूँ इसके लिए आपको क्योंकि आपने जान बूझकर ऐसा नही किया होगा।
रही बात तन्हा रहने की तो उसके लिए मैं निश्चिंत हूँ क्योंकि जिस सूर्य ने मुझ भ्रमित को मेरा पथ दिखलाया है वह अपनी तन्हाई को भी शीघ्र ही बाहर का रास्ता दिखा देगा।आपको पता होना चाहिए कि मैं और अन्य सभी ग्रह उपग्रह आपसे उधार लिए गए प्रकाश के ब्याज से ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं अतः आपका इस प्रकार आत्म दग्ध रहना हम मासूमों के लिए किसी भी प्रकार वांछनीय नही होगा।मेरी इस बात पर गौर अवश्य फरमाइयेगा।
ज्यादा क्या लिखूं,बस रात्रि में आपकी प्रतीक्षा रहेगी।आपकी और अपनी बचपन की फ़ोटो भी भेज रहा हूँ।
आपको खुश एवम स्वस्थ देखने की अभिलाषा के साथ ।
आपका चंद्र

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