एक यात्रा ऐसी भी!
बात मेरे स्नातक के अंतिम वर्ष की परीक्षा की है! मेरा स्नातक राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय अमेठी से हो रहा था। पिता जी की वहीं के स्थानीय थाने जगदीशपुर में तैनाती थी तो वहाँ प्रवेश लिया था मैं। दो वर्ष बाद पिता जी का तबादला बस्ती हो गया तो मुझे भी बस्ती आना पड़ा! परीक्षा दिलवाने साथ मे मेरे विनय भइया भी जाते थे,एक दिन हम लोग बस्ती से फैजाबाद के लिए बस पर बैठे, फैजाबाद पहुँचे,फिर फैजाबाद से जगदीशपुर जाने वाली बस में बैठे,बस को और सवारी भरनी थी तो थोड़ी प्रतीक्षा करनी पड़ी मैं तब तक पान की दुकान से पान खाने चला गया! पान मुँह में डाल कर बस में बैठ गया,बस में ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर एक खूबसूरत सी लड़की बैठी हुई थी! वो मुझे लगातार देखे जा रही थी,उसकी माँ भी उसके साथ थीं! मैं थोड़ा असहज हुआ उसके घूरने से! मैं इग्नोर किया! लेकिन वो लगातार देख रही थी! तो मैं थोड़ा डर गया! मैं सामान्यतः यात्रा के दौरान कुछ मन्त्र जप करता हूँ! सो करने लगा जप! तब तक अचानक वो लड़की मुझसे कहने लगी,"पान मत खाइये,पान आपको नुकसान करेगा! पान थुकिये।" मैं थोड़ा सशंकित हुआ और मन्त्र जप जारी रखा फिर वो बोली क...