प्रेम
प्यार बहुत फ़ालतू चीज़ होती है,प्यार होना ही टोटल फ़ालतू है
किन्तु ये बात भी सत्य है कि
जीवन में ठहराव या सूकून भी प्यार ही देता है!
जीवन को एक खूबसूरत कहानी प्रेम ही बनाता है।
किसी की याद में खोकर मुस्कुराना आह!! कितना सुकून देता है!
और एक जीवनमय जिम्मेदारी गृहस्थी, समाज में लोगों से प्रेम ही जोड़ता है! अगर समुचित आकलन किया जाए तो प्रेम ही सृष्टि का आधार है! ये अद्भुत प्रशांत प्रेम आत्मा का सात्विक भोजन है।
सचमुच ये प्रेम आह! शाश्वत है! निर्मल है! और शीतल है!
Comments
लोभी शीश न दे सके,नाम प्रेम का लेय !!
जब मैं था तब गुरु नहीं,अब गुरु हैं हम नाय !
प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो न समाय !!
जा घट प्रेम न संचरे,सो घट जान मसान !
जैसे खाल लुहार की,सांस लेतु बिन प्रान !!
प्रेमभाव एक चाहिए,भेस अनेक बनाय !
चाहे घर में बास कर ,चाहे बन को जाय !!
कबीरा यह घर प्रेम का,खाला का घर नाहीं,
सीस उतारे भुइं धरे,तब पैठे घर माहीं !!
--संत कबीर साहब