भँवर!
दर्द लिख दूं मैं
एहसास लिख दूं मैं
मगर कैसे लिखू वो ख़्वाब
जो टूटा हुआ-सा है...
कहा था कि नही
कुछ होगा मुझे तेरे जाने के बाद
बहुत कुछ टूट कर देखो
यहाँ, बिखरा हुआ-सा है...
ये कैसे चल रही सांसे
ये कैसे बह रही आहें
तुम ही तुम हो यहाँ देखो
तरसती जा रही आँखे...
ये शब्द भी अवसाद हैं
जीवन-डगर की प्यास है
कि तुम नही मिली मुझे
गिला नही कोई मुझे...
मगर कोई है मुझमे
जो मेरे बाद भी रोता है
मैं लाख सुलाता हुँ
वो हरगिज नही सोता है....
कभी-कभी जी मे आता है
वीरान जंगल सा जलता जाता है
मेरे अंदर एक दावानल
ये कब बुझेगा.....
सांस और तुम हमेशा
साथ आती हो,
दिखाई दो या न दो
हमेशा पास रहती हो...
कि मैं बावरा हुआ-सा
भागता जा रहा हूँ
मगर तुम और तुम्हारी यादे
मुझे भागने नही देती....
ये आंखे अब कभी यूँ ही
मैं मूँद नही पाता
इन काँपते हाथों से ज्यादा
लिख नही पाता....
ये ज़िन्दगी मेरी अब दोस्त
बस मेरी नही रही
तुम्हारे बाद इसमें अब
हज़ारों लोग बसते हैं....
और मैं अपाहिज होकर
देखता ही रहता हूँ
बस देखता-देखता-देखता
सा गुजर जाऊँगा मैं इस भँवर से।।
एहसास लिख दूं मैं
मगर कैसे लिखू वो ख़्वाब
जो टूटा हुआ-सा है...
कहा था कि नही
कुछ होगा मुझे तेरे जाने के बाद
बहुत कुछ टूट कर देखो
यहाँ, बिखरा हुआ-सा है...
ये कैसे चल रही सांसे
ये कैसे बह रही आहें
तुम ही तुम हो यहाँ देखो
तरसती जा रही आँखे...
ये शब्द भी अवसाद हैं
जीवन-डगर की प्यास है
कि तुम नही मिली मुझे
गिला नही कोई मुझे...
मगर कोई है मुझमे
जो मेरे बाद भी रोता है
मैं लाख सुलाता हुँ
वो हरगिज नही सोता है....
कभी-कभी जी मे आता है
वीरान जंगल सा जलता जाता है
मेरे अंदर एक दावानल
ये कब बुझेगा.....
सांस और तुम हमेशा
साथ आती हो,
दिखाई दो या न दो
हमेशा पास रहती हो...
कि मैं बावरा हुआ-सा
भागता जा रहा हूँ
मगर तुम और तुम्हारी यादे
मुझे भागने नही देती....
ये आंखे अब कभी यूँ ही
मैं मूँद नही पाता
इन काँपते हाथों से ज्यादा
लिख नही पाता....
ये ज़िन्दगी मेरी अब दोस्त
बस मेरी नही रही
तुम्हारे बाद इसमें अब
हज़ारों लोग बसते हैं....
और मैं अपाहिज होकर
देखता ही रहता हूँ
बस देखता-देखता-देखता
सा गुजर जाऊँगा मैं इस भँवर से।।
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