काला जादूगर

वो शायद प्रेम से तबतक न परिचित रही हो
मैंने ही उसे प्रेम करना सिखाया..
प्रेम की एक-एक सूक्ष्म सत्ता से उसका परिचय कराया।

हम दोनों में कौन ज्यादा समझदार है ये बात अभीतक अज्ञात है
हम दोनों ने साथ-साथ शादी के हसीन ख्वाब देखे
एक वादियों भरी बस्ती में घर बसाने के ख्वाब देखे....

ऐसे ही वक़्त गुजरता जा रहा था
हम इश्क़ का रसपान कर रहे थे पूरी दुनिया को भुलाकर...

इसी प्रवाह में एक दिन हमदोनों से सफर में एक भूत मिला
बहुत बुरे हालात लग रहे थे उसके,किन्तु था वो बहुत शक्तिशाली.......

वो एक काला जादूगर था
और बहुत निर्दयी भी था
उसके साथ के प्रारंभ से ही
हमारा प्रेम घृणा का रूप लेता गया
और एक दिन हमे बिछड़ना पड़ा

हम अब एक दूसरे की शक्ल तक नही देखते
बात-चित तो दूर की बात है...

हा हमारी तन्हाई में वो भूत
हमारे साथ रहता है..
वो भूत है समाज!











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