ऐ-ज़िन्दगी!
ज़िन्दगी अप्रतिम है..
बीत जाती है, समझ नही आती
कहीं दूर-दूर तक यातनाओं और पीड़ा का सफर
कहीं बर्फ के तीखे एहसास-सी समझ आती है...
समझ, ज़िन्दगी और उलझन
ये तीनों घनिष्ठ मित्र हैं....
जैसे-जैसे समझ बढ़ी
ज़िन्दगी घनीभूत हुई
और फिर उलझनों का अपार संसार विस्तृत होता है...
सत्य सदियों से वैरागी रहा है
झूठ सदियों से भोग के जकड़न में रहता है
किन्तु दुर्भाग्य ये है कि
झूठ ने सत्य को कैद कर दिया है...
सत्य को प्रताड़ित किया है...
झूठ के पास वस्त्र होते हैं...
सत्य निर्वस्त्र होता है....
इसलिये जब भी सत्य झूठ के मोहल्ले से
होकर गुजरा...झूठ ने उसे
असामाजिक घोषित करके
उसके पांवों में बेड़ियाँ डलवाया
मारा-पीटा सूली पर चढ़ाया..
अधिकतम ज़िंदगियाँ मुझे
सरकारी कार्यालयों की धूल से चिपटी-लिपटी
ज़िल्द-सी ही दिखती हैं...
ज़िन्दगी तू सचमुच एक रहस्य है
रहस्यों का रहस्य हैं!
और ऐ-ज़िन्दगी तूने सत्य को
इतना अकेला क्यों कर दिया!
बीत जाती है, समझ नही आती
कहीं दूर-दूर तक यातनाओं और पीड़ा का सफर
कहीं बर्फ के तीखे एहसास-सी समझ आती है...
समझ, ज़िन्दगी और उलझन
ये तीनों घनिष्ठ मित्र हैं....
जैसे-जैसे समझ बढ़ी
ज़िन्दगी घनीभूत हुई
और फिर उलझनों का अपार संसार विस्तृत होता है...
सत्य सदियों से वैरागी रहा है
झूठ सदियों से भोग के जकड़न में रहता है
किन्तु दुर्भाग्य ये है कि
झूठ ने सत्य को कैद कर दिया है...
सत्य को प्रताड़ित किया है...
झूठ के पास वस्त्र होते हैं...
सत्य निर्वस्त्र होता है....
इसलिये जब भी सत्य झूठ के मोहल्ले से
होकर गुजरा...झूठ ने उसे
असामाजिक घोषित करके
उसके पांवों में बेड़ियाँ डलवाया
मारा-पीटा सूली पर चढ़ाया..
अधिकतम ज़िंदगियाँ मुझे
सरकारी कार्यालयों की धूल से चिपटी-लिपटी
ज़िल्द-सी ही दिखती हैं...
ज़िन्दगी तू सचमुच एक रहस्य है
रहस्यों का रहस्य हैं!
और ऐ-ज़िन्दगी तूने सत्य को
इतना अकेला क्यों कर दिया!
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