खत-८

मैं प्रेमी हो ही नही सकता!
मैं गुरु होकर ही जन्मा हूँ
मैंने आपसे प्रेम कभी किया ही नही
छल किया,प्रति पल छल...

लेकिन गुरुत्व के रूप में
मैं शतप्रतिशत समर्पित था,हूँ और रहूँगा।
विरह,मिलन इत्यादि मेरे लिये शब्द मात्र हैं
मेरे पास हृदय नही प्रेम वाला!

किन्तु हाँ; मेरा छल आपके विशिष्टीकरण हेतु रहा...
सब कुछ मेरे बस में था किंतु मैंने बेबसी का स्वांग रचा
इसलिए कि आप इतिहास रच सके....

मेरा क्या है,मेरी फिक्र मत करियेगा..
क्योंकि इस संसार मे कोई भी मेरे साथ चलने कि हिम्मत लेकर नही पैदा हुआ न होगा तो आप क्या चीज हैं!

ईश्वर आपको स्वस्थ रखेंगे
इस वर्ष आपको इतिहास रचना है अपने काबिलियत से...

मैं एक पथभ्रष्ट गुरु हूँ इसलिए निश्चिंत रहिये
आप को या आपके साये से भी गुरुदक्षिणा नही मांगूंगा!

आपका
सखा(एक कपटी! Flrtatious)


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