कब्ज़!
क्या ये जो मैं लिखता हूँ ये यूँही है?
या इसका कोई उद्देश्य है!ये प्रश्न मुझे परेशान करते हैं कभी कभी!तब मैं आसान-सा जवाब दे देता हूँ इन प्रश्नों को ज़िन्दगी का हवाला देते हुए।
ज़िन्दगी भी तो हम बेवजह ही जीते हैं,है कोई जानता कि जिंदगी का एक-एक पल जो व्यतीत हो रहा है इसका उद्देश्य है या उद्देष्यविहीन है।
फिर मैं जवाब भी यथेष्ट देता हूँ इन प्रश्नों का;कि मैं उल्टी करता हूँ अपने विचारों का जिससे मुझे कब्ज़ न हो!
क्योंकि कब्ज़ मेरे मुल्क में ८०% लोगों को है।
मैं अपनी कब्ज को ठीक कर लेता हूँ लोगों की फ़िक्र करने वाला मैं होता ही कौन हूँ!
मुझे तो मेरे मैं को भी विसर्जित करना है और कर रहा हूँ नारायण के संरक्षण में।
एक बात जो ध्रुव-सत्य है कि व्यक्ति का मित्र भी एवं शत्रु भी वो स्वयं ही होता है।चुनाव निर्धारित करता है आगामी जीवन।
हम सुधरंगे नही किन्तु अभिलाषा है सम्पूर्ण जगत सुधार ले।
बात जब देश की आती है तो मुझे तंत्र और तंत्र-संचालन देख कर घृणा होती है।
चार वर्ग राष्ट्र में अगर ढंग से कार्य करे तो लगभग ९०% समस्या वैसे ही सुधर जाएगी पुलिस, एडवोकेट, शिक्षा एवं
चिकित्सा!
लेकिन नही कब्ज़ की शिकायत है,"पेट भी न भरे ढंग से और साफ भी न हो ढंग से।"
जनता मूढ़ नही हो सकती बल्कि उसे मूर्ख बनाया जाता है और इस कला में कुछ लोग सिद्धहस्त हैं,वोटबैंक के अतिरिक्त राजनेताओं को कुछ दिखता ही नही।
कुछ नहीं बस कब्ज है कब्ज इस कब्ज को दूर करने की जिम्मेदारी सभी की है।
या इसका कोई उद्देश्य है!ये प्रश्न मुझे परेशान करते हैं कभी कभी!तब मैं आसान-सा जवाब दे देता हूँ इन प्रश्नों को ज़िन्दगी का हवाला देते हुए।
ज़िन्दगी भी तो हम बेवजह ही जीते हैं,है कोई जानता कि जिंदगी का एक-एक पल जो व्यतीत हो रहा है इसका उद्देश्य है या उद्देष्यविहीन है।
फिर मैं जवाब भी यथेष्ट देता हूँ इन प्रश्नों का;कि मैं उल्टी करता हूँ अपने विचारों का जिससे मुझे कब्ज़ न हो!
क्योंकि कब्ज़ मेरे मुल्क में ८०% लोगों को है।
मैं अपनी कब्ज को ठीक कर लेता हूँ लोगों की फ़िक्र करने वाला मैं होता ही कौन हूँ!
मुझे तो मेरे मैं को भी विसर्जित करना है और कर रहा हूँ नारायण के संरक्षण में।
एक बात जो ध्रुव-सत्य है कि व्यक्ति का मित्र भी एवं शत्रु भी वो स्वयं ही होता है।चुनाव निर्धारित करता है आगामी जीवन।
हम सुधरंगे नही किन्तु अभिलाषा है सम्पूर्ण जगत सुधार ले।
बात जब देश की आती है तो मुझे तंत्र और तंत्र-संचालन देख कर घृणा होती है।
चार वर्ग राष्ट्र में अगर ढंग से कार्य करे तो लगभग ९०% समस्या वैसे ही सुधर जाएगी पुलिस, एडवोकेट, शिक्षा एवं
चिकित्सा!
लेकिन नही कब्ज़ की शिकायत है,"पेट भी न भरे ढंग से और साफ भी न हो ढंग से।"
जनता मूढ़ नही हो सकती बल्कि उसे मूर्ख बनाया जाता है और इस कला में कुछ लोग सिद्धहस्त हैं,वोटबैंक के अतिरिक्त राजनेताओं को कुछ दिखता ही नही।
कुछ नहीं बस कब्ज है कब्ज इस कब्ज को दूर करने की जिम्मेदारी सभी की है।
Comments