आठ दिन की दुनिया!

बेरी अंकल!...

बेरी अंकल रिहैब में मिले,4 महीने हो गए थे उनको वहाँ, खूबसूरत व्यक्तित्व है उनका सीतापुर के आसपास के कहीं के निवासी हैं! 2003 में प्रेम विवाह किये थे,बता रहे थे कि जिस लड़की से 10 वीं से प्रेम किये, पहला प्रेम किये,उसी से विवाह किए,उस दिन उनका पचासवाँ जन्मदिन था,बाहर से बहुत मजबूत दिखने का भरपूर प्रयास करते थे किन्तु उनकी आँखों मे क़ैद होने का दर्द कम से कम मैं स्पष्ट देख सकता था,मैंने पूछा अंकल ,"जब आप यहां से निकलेंगे तो क्या करेंगे?" उन्होंने कहा,"जिस दिन निकलूँगा, खूब शराब पियूँगा" मैंने कहा कि आप फिर यहीं आ जायेंगे! वो कहें कि पहले  तय करूँगा कि देखो मैं बदलूँगा नही यदि बदलने की आश्वस्तता लेकर आई हो(उनकी पत्नी से) तो फिर मुझे यहीं रहने दो,मत ले चलो!

जीवन मे बहुत पैसा कमाए हैं वो!

मैं अनायास मुस्कुराया और चुप हो गया! वो अक्सर कहते कि दुनिया का आखिरी सत्य जो उन्होंने अनुभव किया यही था "कि तुम्हारा तुम्हारे सिवा कोई और नही है! इसलिये जो भी करना है अपने लिए करो,जीना है,अपने लिये जियो!,तुम्हारे मृत्यु के बाद तुम तत्क्षण भुला दिए जाओगे! किसी को कोई फ़र्क़ नही पड़ता तुम्हारे होने न होने से।" बात सुनने में साधारण थी लेकिन बहुत गूढ़ थी, लगभग 150 से ज्यादा कैदियों(मरीजों) में सबसे जीवंत व्यक्ति मुझे वही लगते थे,सी सी टी वी से नजरें चुरा कर भरसक प्रयास करता कि उनसे बात हो जाये, तीन इंसुलिन की सुई लेते थे दिन भर में वो!....और बहुत सारी दवाइयां भी!...फिर भी मस्तमौला गम्भीर व्यक्ति हैं...

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