पुनर्नवा

जज्बातों से घिरा हुआ एक इंसान हूँ मैं,एक ऐसा आदमी जो ख्वाहिशें पाल कर जीता है! दुनिया रूपी रंगमंच पे अभिनय करता हुआ बहुत सारी आशाओं से भरा एक अभिनेता हूँ!

मैं बहुत सारी उम्मीदों को पिरोया हुआ हूँ अपनी स्वांसों की माला में!

भगवान को बहुत सारा धन्यवाद मुझे काबिल बनाने के लिये!हृदय से अपने वर्तमान को लेकर तसल्ली अभिव्यक्त करता हूँ!मुझे इस पथ पर जिसपर मैं चल रहा हूँ पूरे विश्वास के साथ चलना है!

मेरा परिवार और समाज मुझे चाहे जिस नजर से देखे या देखता  हो फ़र्क़ पड़ता है किन्तु अभिव्यक्ति मौन है मेरी!

जीवनपथ पे मिलने वाले कुछ मुसाफिरों से सम्मान एवं कुछ से अपमान मिलता रहता है,ये उनका व्यक्तिगत निर्णय है मेरा कोई अधिकार नही कि मैं उसे परिवर्तित करूँ या करने की कोशिश करू!

जीवन एक अज्ञात यात्रा है अभी 28 वर्ष पूरे हो रहे है मेरे जीवन के,आगे का सफर भी योगेश्वर श्रीकृष्ण ही मुकम्मल करेंगें!

हे न्याय के मालिक तुमसे पुकारता हूँ मैं मुझे कष्ट दो,तक़लीफ़ दो सभी रंग दिखाओ किन्तु मुझे इतना यकीन है कि एक न्याय अभी शेष है!

और पूर्ण विश्वास है मुझे कि वो न्याय प्राप्त होगा मुझे!


Comments

Popular posts from this blog

परिचय!

समर्पित प्रेयसी!

आधुनिक अकड़!