आखिर कब तक? और क्यों?
तुम्हे तो छोड़ आया
किन्तु आखिर कब मुझे
मुक्ति मिलेगी तुमसे..
बोलो आखिर कब तक।
नियति की प्रवृत्ति है
जो हुआ मेरे और तेरे दरम्यान
कुछ विशेष प्रयोजन होगा..
मैं मूकदर्शक बना देख रहा हूँ।
न मेरे न आपके प्रेम में कमी
हुई फिर भी आखिर क्यों
हमे जुदाई नसीब हुई...
नियति की प्रवृत्ति मैं चरित्रहीन
और आप चरित्रवान...
आखिर कब तक?ये दंश मुझे
महसूस होते रहेंगे...
जब-तक हों मुझे सर्वस्व स्वीकार है।
ये तस्वीर विशेष है मेरे लिए...
आपको आपके जन्मदिवस की अग्रिम शुभकामनाएं
ये वर्ष आपकी समस्त जड़ता को नष्ट कर देगा!
किन्तु आखिर कब मुझे
मुक्ति मिलेगी तुमसे..
बोलो आखिर कब तक।
नियति की प्रवृत्ति है
जो हुआ मेरे और तेरे दरम्यान
कुछ विशेष प्रयोजन होगा..
मैं मूकदर्शक बना देख रहा हूँ।
न मेरे न आपके प्रेम में कमी
हुई फिर भी आखिर क्यों
हमे जुदाई नसीब हुई...
नियति की प्रवृत्ति मैं चरित्रहीन
और आप चरित्रवान...
आखिर कब तक?ये दंश मुझे
महसूस होते रहेंगे...
जब-तक हों मुझे सर्वस्व स्वीकार है।
ये तस्वीर विशेष है मेरे लिए...
आपको आपके जन्मदिवस की अग्रिम शुभकामनाएं
ये वर्ष आपकी समस्त जड़ता को नष्ट कर देगा!

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