पुकार..प्यारे बच्चों से!

तुम बच्चे हो
और सच्चे हो
तन-मन-धन से
विमुक्त हो तुम,
ऊर्जित हो प्रिय
रक्षण करो तुम खुद का
धुन-रमाओ तन-मन-धन का।।

माँ के चरण-स्पर्श कर
तुम विश्व-वर्धन में लग जाओ
कुलदीपक हो कुलवर्धक हो!।।

कमियों का कर दो
विसर्जन;अभ्युदय को स्वीकार करो
खेलो,खाओ,जियो और जीने दो।।

माँ-जो भी मिले पथ में तुमको
शीस झुकाओ खुद का
माँ के अभिवर्धन में प्यारे।
प्रतिपल नतमस्तक हो,कर्म करो।।

तुम भारत की पहचान हो
आन-बान और शान हो।

तुम वीर भगत के चेले हो
आज़ाद की आज़ादी हो
तुम महात्माओं की कुर्बानी हो।।

आओ प्यारे वीरो आओ
मातृभूमि को स्वर्ग बनाओ!
किंचित भी तुम मत पछताओ,
मातृ-भूमि में रम-रम जाओ।।

बनों वीर तुम राम हो
तुम कृष्ण और कलाम हो।।
तुम ही तो बुद्ध हुए
महावीर भी तुम ही हो।
जीसस और मोहम्मद हो।।
जो बाँटे तुमको उसको
भी अपनी करुणा का पात्र चुनो।।

समृध्दि हो अभिवृद्धि हो
जो मिटे नही वो सिद्धि हो।।

तुम वीर-सपूत हो भारत के
मानवता के रखवाले हो।।

अहिँसा मन्त्र तुम्हारा है
मानवता ही बस नारा है।
तुम कूदो इस सागर में
कुछ-क्षण बाद किनारा है।।






Comments

Popular posts from this blog

परिचय!

समर्पित प्रेयसी!

आधुनिक अकड़!