स्नेहा का स्नेह!

प्रिय रजनीश,
चुकि telecommuication का युग है,फिर भी मैंने पत्र लिखना चुना।
आप एक यायावर फ़क़ीर हैं और स्वतंत्रता आपकी पहचान है।
आपको एक दफा प्रेम-प्रस्ताव अर्पित किया किन्तु आपने स्पष्ट मना कर दिया,,,
फिर भी मैं देर-अबेर आपसे मिल ही लेती थी।
चुकि अब मुझे आपके समक्ष होने में लज़्ज़ा आ रही है,
अब मैं अपने प्रेम के बांध को ज्यादा दिन तक नही रोक सकती...
इसलिये प्रिय रजनीश जी मुझे आज्ञा दीजिये विश्व कल्याण हेतु....
आपकी
स्नेहा..आई.ए. एस

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