शराब!
ये भी एक प्यास ही है मेरी
कि जीवन-जगत से दूर रहूँ
पहचान ही न हो कोई...
आरम्भ से प्रारंभ करूँ...
किन्तु ये विशेष नही
बस एक कीमिया है जो परिवर्तित हुई है
मध्यम हो जाना ही विकल्प बचा..
सूत्र पकड़ने के लिये...
और जैसे ही मध्यम का ज्ञान होगा...
चक्रण से मुक्ति मिलेगी
किंतु इस मुक्ति की आसक्ति न होना जरूरी है!
आँख मुंदने के पहले आंख मूंदे अगर स्वतः
तो क्रांति सम्भव है
कि जीवन-जगत से दूर रहूँ
पहचान ही न हो कोई...
आरम्भ से प्रारंभ करूँ...
किन्तु ये विशेष नही
बस एक कीमिया है जो परिवर्तित हुई है
मध्यम हो जाना ही विकल्प बचा..
सूत्र पकड़ने के लिये...
और जैसे ही मध्यम का ज्ञान होगा...
चक्रण से मुक्ति मिलेगी
किंतु इस मुक्ति की आसक्ति न होना जरूरी है!
आँख मुंदने के पहले आंख मूंदे अगर स्वतः
तो क्रांति सम्भव है
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