३३अंक!

ये बात २०१४ अप्रैल की है;मैं परीक्षा दे रहा था, स्नातक तृतीय वर्ष का;समाजशास्त्र का।
परीक्षा कक्ष में बैठा था मैं,मैं अंग्रेजी भाषा में लिख रहा था १३ मिनट हुए थे परीक्षा कक्ष में लिखते हुए...
तभी अचानक मुझे मेरे एक मित्र की कही हुई बात याद आई!

"प्रभाकर! तुम १००/१०० बहुत बार पाए हो; कभी परीक्षा में ३३ अंक,जो न्यूनतम अंक है उत्तीर्ण होने के लिये,पाओ बस इतना ही लिखना परीक्षा में।"

तभी मेरे एक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ आर के यादव, कक्ष निरीक्षण के दौरान मुझसे पूछे,"प्रभाकर क्या हाल है?"
मैंने उत्तर दिया," ठीक हूँ सर!"

वो आगे बढ़े,२ कदम बढ़े होंगे कि मैंने उन्हें बुलाया,"सर! सुनिये!"
वो बोले,"हाँ, कहो! क्या है।"
मैंने कहा उनसे,"सर ज़रा देखिये,ये जितना लिखा हूँ,३३अंक मिल जाएंगे इससे १००अंक में!"
उन्होंने देखा और कहा "हाँ मिल जाएगा!"
मैं तत्क्षण उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका दे दिया!
"सर हो गया,जमा कर लीजिए.."

ये राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदीशपुर अमेठी की घटना है!

....जारी रहेगा....

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