निरन्तर
देखता हूं मैं भी
ढूंढता हूँ मैं भी एक किसी को
जिससे पहचान हो
जिसको पहचान हो
...दिखता है मुझे एक
खूबसूरत सा अब!
डूबना भी नही है
और छोड़ना भी नही है,
यही सफर है बस अब ही का
एक तरंग निकले मुझसे
जो छू जाए सबके
अनछुए एहसास को
एक ख्वाब को जो
ख्वाब भी है और
पूरा भी हो रहा है!
ढूंढता हूँ मैं भी एक किसी को
जिससे पहचान हो
जिसको पहचान हो
...दिखता है मुझे एक
खूबसूरत सा अब!
डूबना भी नही है
और छोड़ना भी नही है,
यही सफर है बस अब ही का
एक तरंग निकले मुझसे
जो छू जाए सबके
अनछुए एहसास को
एक ख्वाब को जो
ख्वाब भी है और
पूरा भी हो रहा है!
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