अपरिचित
यूँ तो प्रेम बन्धन में डालता है किन्तु
तुम किस देश के वासी हो,
सांवरे नही न हो,
की तुम्हारी छांव बहुत अद्भुत है,
वासना का कोई प्रश्न नही
किन्तु तुम किस देश के वासी हो,
क्या सीखे कहाँ पले कहाँ बढ़े
कि तुम्हारे छांव में सारे बन्धन खुलते है धीरे धीरे,
कल तुम जो भी रहो, या मै मैं न रहूँ
किन्तु मेरी स्मृतियों में तुम हमेशा
वैसे ही रहोगे जैसे तुम्हारी स्मृति में
तुम्हारी माँ की यादें है;
तुम्हारा सब कुछ मेरे खजाने को भरता जाता है,जबकि मैं भी लुटाने ही चला हूँ, फिर भी तुम किस देश के वासी हो;
कहते है कि कुछ लोग बड़े विशिष्ट होते है,तुम मेरे लिए उस कृष्ण का रूप हो,तुम कही भी रहो तुम मुझसे अलग नही हो,
बस मैं उस योगेश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि वो मेरे और तुम्हारे संबधो को और पवित्र करे एवं उसकी रक्षा करें!
तुम किस देश के वासी हो,
सांवरे नही न हो,
की तुम्हारी छांव बहुत अद्भुत है,
वासना का कोई प्रश्न नही
किन्तु तुम किस देश के वासी हो,
क्या सीखे कहाँ पले कहाँ बढ़े
कि तुम्हारे छांव में सारे बन्धन खुलते है धीरे धीरे,
कल तुम जो भी रहो, या मै मैं न रहूँ
किन्तु मेरी स्मृतियों में तुम हमेशा
वैसे ही रहोगे जैसे तुम्हारी स्मृति में
तुम्हारी माँ की यादें है;
तुम्हारा सब कुछ मेरे खजाने को भरता जाता है,जबकि मैं भी लुटाने ही चला हूँ, फिर भी तुम किस देश के वासी हो;
कहते है कि कुछ लोग बड़े विशिष्ट होते है,तुम मेरे लिए उस कृष्ण का रूप हो,तुम कही भी रहो तुम मुझसे अलग नही हो,
बस मैं उस योगेश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि वो मेरे और तुम्हारे संबधो को और पवित्र करे एवं उसकी रक्षा करें!
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