सम्यक व्यक्तित्व!...२
१-सुंदर आपकी देंह, चेहरा इत्यादि नही होता है। सुंदर होता है सत्य! सत्य परम सुंदर है,सत्य छोटे-छोटे अभ्यास से प्रारंभ होकर एक विस्तीर्ण रूप धारण करता है जो बहुत मधुर एवं मनोहर होता है। यदि आप सत्य का पालन कर रहे हैं तो आपको धर्म का मार्ग मिलेगा जहां आपको शांति एवं सुकून दोनों मिलेगा एवं आप निरन्तर नूतनता के बोध से जागृति के मार्ग पर अग्रसर होकर इस संसार से मुक्त होकर परमधाम को जायेंगे।
२-यदि आप किसी समुदाय, समाज,राष्ट्र या विश्व में कहीं भी निवास कर रहे हैं तो आपको किसी भी ऐसे आचरण को धारण नही करना चाहिये जिससे आप बहुसंख्यक समूह के सद्चरित्र लोगों पर बोझ बने! आपको अपने आचरण से सदैव एक सुगंध प्रसारित करके शांति,सन्तोष एवं प्रेम की स्थापना करने का भरसक प्रयत्न करना चाहिए।
३-आपको प्रकृति के प्रति सदा अनुग्रहीत भाव से समर्पित होकर उसके उत्थान एवं समृद्धि में जितना सम्भव हो सहयोग करके इस पृथ्वी को औऱ सुंदर हरा भरा बनाकर ही इस नश्वर शरीर का त्याग करना चाहिए।
Comments
वैसे सत्य क्या है - समाज द्वारा निर्धारित मानक निर्धारित करते थे। परन्तु अब व्यक्ति की आवश्यकता निर्धारित कर रही है। जो जरूरी है वहीं सच है । यानी अब एक ही घटना का सच हर अलग व्यक्ति के लिए अलग अलग है।
लेनिन चरित्र और आचरण तो ऐसे हीरें है जिसका मानक वहीं है जो आप लिखे , समाज इसे अबतक बदल नहीं पाया ।
सच तो यह है ही की प्रकृति और पृथ्वी की सुंदर और हरा - भरा बनाना चाहिए लेकिन सत्य है कि हमारी आवश्यकता खुद को सुंदर ही बनाने तक रह गई है वो भी मात्र भौतिक ना कि नैतिक।
The truth behind true - Rajnish Tripathi
Aise behtarin vichar ke sath jeevan me aage badhna chahunga.