रसिक-विस्तार
राधा कृष्ण गोपी कृष्ण ,अनेक स्थानों पर कृष्ण रास रचाते है अलग अलग देवियों से,देवियों को डाह नही होता क्या? होता है, एक गोपी कृष्ण से पूछती है कि कान्हा यदि राधा को या हम सब को किसी अन्य पुरूष में आसक्ति हो तो क्या तुम्हें ईर्ष्या नही होगी,
कृष्ण इस जिज्ञासा को शांत कर अपना विश्वदर्शन रूप दिखाते है गोपी को ,कहते है गोपी कोई और,अरे कोई भी इस संसार में या अनन्त तक मुझसे रहित नही हो सकता इतना विस्तार है इस रसिक का,और कृष्ण के इस उदार दर्शन ने सारे द्वंद्व को परिवर्तित कर दिया विशद समर्पण में।
प्रेम में विश्व दर्शन हो जाता है।
कृष्ण इस जिज्ञासा को शांत कर अपना विश्वदर्शन रूप दिखाते है गोपी को ,कहते है गोपी कोई और,अरे कोई भी इस संसार में या अनन्त तक मुझसे रहित नही हो सकता इतना विस्तार है इस रसिक का,और कृष्ण के इस उदार दर्शन ने सारे द्वंद्व को परिवर्तित कर दिया विशद समर्पण में।
प्रेम में विश्व दर्शन हो जाता है।
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