तुम से मिलूंगा एक दिन तब कोई औपचारिक बन्धन नही होगा, मैं भी नग्न रहूँगा तुम भी ,उस वक़्त एक उत्साह घटित होगा।
मैं कुछ भी नही बोलूंगा मुझे कुछ कहने की जरूरत नही रहेगी,हमारा निर्वस्त्र होना ही सब कह देगा।
कितने वस्त्र कितने आभूषण ईजाद कर लिये हमने अबतक अब मैं निर्वस्त्र हूँ हमेशा,मुझे इंतज़ार है तुम्हारे निर्वस्त्र होने की।
शून्य का बोध नग्न होने से ही होता है
बिना नग्न हुए हम सत्य से अपरिचित ही रहेंगे।
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