भूखे का भ्रम
क्यों प्रकाश की भूखी दुनिया,
क्यों इतना दावानल है,
ये भूख एक भीख है,
जो तुम्हे दिव्यप्रभा से दूर कर देगी,
प्रारंभ से वंचित हो जाओगे तुम,
बिल्कुल विरोधाभास है यहाँ,
सतियों की वैष्यवृत्ति,
एवं वैश्याओं का सतीत्व,
तुम शायद देख न सको,
क्योंकि अंधकार से चिढ़ है तुम्हे,
बड़भागी होते है वो लोग जिन्हें अंधकार,
मयस्सर होता है और विजयी होते है वो,
जो अपना हृदय मुक्त कर देते अंधकार में,
और जिनको अंधकार देखना हो,
फिर उन्हें तुम्हारे जैसे आँखों की कोई आवश्यकता नही,
उनकी बौखलाहट भूख से नही होती,
जरा अंधकार को स्वीकार तो करो!
क्यों इतना दावानल है,
ये भूख एक भीख है,
जो तुम्हे दिव्यप्रभा से दूर कर देगी,
प्रारंभ से वंचित हो जाओगे तुम,
बिल्कुल विरोधाभास है यहाँ,
सतियों की वैष्यवृत्ति,
एवं वैश्याओं का सतीत्व,
तुम शायद देख न सको,
क्योंकि अंधकार से चिढ़ है तुम्हे,
बड़भागी होते है वो लोग जिन्हें अंधकार,
मयस्सर होता है और विजयी होते है वो,
जो अपना हृदय मुक्त कर देते अंधकार में,
और जिनको अंधकार देखना हो,
फिर उन्हें तुम्हारे जैसे आँखों की कोई आवश्यकता नही,
उनकी बौखलाहट भूख से नही होती,
जरा अंधकार को स्वीकार तो करो!
Comments