दोषारोपण
इस समय या प्रत्येक समय ये एक तरह की प्रवृत्ति रही है कि दोषारोपण किया जाए। दोषारोपण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे वह व्यक्ति जो दोषारोपण करता है उसके क्षति की ज्यादा सम्भावनाये है,क्योंकि वो आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया से तत्क्षण पलायित हो जाता है।
दोषारोपण कभी कभी आवश्यक है,और जो नित्य आवश्यक है वो है आत्मविश्लेषण ,क्योंकि आत्मविश्लेषण से तत्क्षण निर्णय को टाला जा सकता है।
आप का दोष दिखाता समाज आपको सुअवसर देता है कि आप स्वयं को परिमार्जित करें।
उत्तम रूप में खुद को प्रकट करने में सक्षम हो,तत्क्षण निर्णय कभी आपके लिये शुभ चेतन का कार्य नही करता बल्कि आपजो जिम्मेदारियों से भाग जाने को निर्देशित करता है,जिससे आप दीर्घसूत्री हो जाते है।
दीर्घसूत्री होना एक प्रकार की व्यक्तिगत व्यक्तित्व विषयक कमी है जो आपको आनन्द के सर्वोत्तम रूप को प्राप्त करने में बाधक होता है।
राजनीतिक व्यक्ति यदि अपने लिये कुछ विशेष कर सकता है तो उसको दोषारोपण नही करना चाहिये एवं खुद का निरीक्षण करना चाहिये।
जिससे समाज विकास के सकारात्मक दिशा को प्राप्त होता है।
दोषारोपण कभी कभी आवश्यक है,और जो नित्य आवश्यक है वो है आत्मविश्लेषण ,क्योंकि आत्मविश्लेषण से तत्क्षण निर्णय को टाला जा सकता है।
आप का दोष दिखाता समाज आपको सुअवसर देता है कि आप स्वयं को परिमार्जित करें।
उत्तम रूप में खुद को प्रकट करने में सक्षम हो,तत्क्षण निर्णय कभी आपके लिये शुभ चेतन का कार्य नही करता बल्कि आपजो जिम्मेदारियों से भाग जाने को निर्देशित करता है,जिससे आप दीर्घसूत्री हो जाते है।
दीर्घसूत्री होना एक प्रकार की व्यक्तिगत व्यक्तित्व विषयक कमी है जो आपको आनन्द के सर्वोत्तम रूप को प्राप्त करने में बाधक होता है।
राजनीतिक व्यक्ति यदि अपने लिये कुछ विशेष कर सकता है तो उसको दोषारोपण नही करना चाहिये एवं खुद का निरीक्षण करना चाहिये।
जिससे समाज विकास के सकारात्मक दिशा को प्राप्त होता है।
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