भोर!
भोर का मोर विस्मृत हो गया,
नूतन दिनचर्या में,
दांतुन अब जमाने का विषय है,
क्या खोया क्या पाया,
अब भोर के लोग,
पलायन कर रहे हैं,
किसी अन्य दुनिया की ओर,
उर्जाविहीन हो जाएंगे,
वो लोग भोर का सामना कर कर के,
क्योंकि अब बहिर्मुख यात्रा,
कर रहे है,
फिर भोर के मायने बदल गए!
नूतन दिनचर्या में,
दांतुन अब जमाने का विषय है,
क्या खोया क्या पाया,
अब भोर के लोग,
पलायन कर रहे हैं,
किसी अन्य दुनिया की ओर,
उर्जाविहीन हो जाएंगे,
वो लोग भोर का सामना कर कर के,
क्योंकि अब बहिर्मुख यात्रा,
कर रहे है,
फिर भोर के मायने बदल गए!
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