आँसू

आँसू!

जब समस्त व्यथा का निचोड़
आंसुओं से अभिव्यक्त हो जाये!
कर्म-कल्मष सारे पाप धुल जाएं
वो पल सुखमय हो जाये
आँसू नयनों में आएं!

अट्टहास से ज्यादा मुझको
आँसू ही भाते हैं....
तुम करते हो मन को भाररहित
पीड़ा बह जाती तुम संग!
तुम अद्भुत सखा हमारे हो
हे आँसू आते रहना
मन को सहलाते रहना!

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सच ये अपने अकेलेपन के बड़े ही भले साथी हैं।मनको धुल देते हैं ठीक वैसे ही जैसे पहली बारिश से सम्पूर्ण प्रकृति धुल जाती हो।

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