हँसती लड़की!

रास्ते से जा रही थी वो,
कोई आकर्षक खिलौने नही थे,
फिर भी बेबाक हंसना उसका,
बेफिक्र मुस्कान उसकी उस बच्चे से,
ज्यादा कीमती थे जिसके हाथ में रिमोट वाला हवाई जहाज़ था,
उस मासूम सी बच्ची ने अकस्मात मुझको बहुत कुछ सीखा दिया, सिखाया उसने की खुसी के लिये धन दौलत जरूरी नही बल्कि जरूरी है तो स्वीकार्य आनन्द और संतुष्ट सलीका जो पैसे रुपये से कतई नही आता,
उसके लिये अनुग्रह की आवश्यकता है,हम कितने अनुग्रह से भरे है उस प्रकृति के प्रति जिसने हमे बस दिया ही दिया है,
लेकिन हमारी प्यास बुझती ही नही,और पाना है हमे और!
वो हँसती हुई लड़की अपने आप मे एक हस्ती थी जिसे शायद मैं ही समझ रहा था,क्योंकि मैंने उसकी आंतरिक झलक जो देख ली थी!

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