कीमत

वक़्त के बारे में इतने अचंभित क्यों हैं आप,ये है ही है,अनंत असीम,बस समायोजित होना सीखना है आपको,वक़्त के साथ जैसे जैसे समायोजित होंगे सब रहस्य प्रत्यक्ष हो जाएगा धीरे धीरे,
लेकिन इसको सीखना पड़ेगा,बिल्कुल पुष्प जैसा है ये वक़्त का मरहम धीरे धीरे लगाना प्रारंभ करेंगे आप,और एक तथ्य आवश्यक है,वो है बेफिक्र होना,बेफिक्री जरूरी है।
ये आसान भी नही है,और कठिन भी नही है,बस सम्यक होना है और आप पाएंगे कि धीरे धीरे आप वक़्त के साथ हो गए,और आपको कीमत की फिक्र नही करनी है,बस चलना है आपको वक़्त के साथ! सानन्द!
यही ज़िन्दगी की कीमत है!

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