उद्देश्य!
इस धरा पर आकर गर तुम,
प्रेम नही पहचान सके,
जीवन से तब मृत्यु सखे,
तुम श्रेष्ठ समझ लेना,
क्योंकि प्रेम रहा वो तत्व सखे,
धरा पे तुम प्रकट हुए,
गर प्रेम नही तुमने जाना,
सारा सार भस्म कर डाला,
विस्मृत होना तम नही,
अजागृति महान तम है,
तम ही नही कुण्डित है!
प्रेम नही पहचान सके,
जीवन से तब मृत्यु सखे,
तुम श्रेष्ठ समझ लेना,
क्योंकि प्रेम रहा वो तत्व सखे,
धरा पे तुम प्रकट हुए,
गर प्रेम नही तुमने जाना,
सारा सार भस्म कर डाला,
विस्मृत होना तम नही,
अजागृति महान तम है,
तम ही नही कुण्डित है!
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