कविता(poetry)

गर इम्तिहान न होता,
ज़िन्दगी इत्मीनान न होती,
एक ख्वाब,एक लम्हा,और है, ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी के सफर की धूप ज़रूरी है,
जिससे छांव की कशिश बरकरार रहे,
कुछ टूटे फूटे शब्द यूँही गढ़ते रहने,
से कविता ही बने ये ज़रूरी नही,
ज़रूरी है,वो चाह जो विपरीत है,
तुम्हारे,और आना चाहे तुम्हारी तरफ़,
तो तुम्हारा हर लफ्ज़ चाहे अपाहिज ही हो,
एक कविता होगी,एक ग़ज़ल होगी!

"अहिंष्य"

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