Male-पुरूष

माँ और पत्नी के झगड़ो में मै मध्यस्थ रहता हूं,
माँ को बोलू तो नालयक,
पत्नी को बोलू तो बेवफा,
इसलिए ये झगड़ा शांत हो जाये जल्दी से,,,
ऐसी मिन्नतें करता हु,
खुद जनरल में यात्राएं कर के भी,
बहन को ऐसी में भेजता हु,
घर परिवार का नाम मुझसे ही चलता है,
बदनामी से हर पल डरता हूँ,
जो मेरे लाडले हुए,उनके भविष्य के लिए,
कभी दो चार थप्पड़ रशीद कर दिए,
इसके वजह से उनसे आजन्म दूर हो जाता हूं,
कभी सीने से भी न लगा पाता हूं,
एक एक कौड़ी के लिए ज़माने भर की ठोकरे खाता हूं,
 उम्र के बढ़ते,एक एक पायदान पर,
मेरी जबान कम से कमतर खुलती है,
फिर भी मैं शोषक हूँ,अत्याचारी हूँ,
क्योंकि मैं पुरूष हूँ,
बाप क्या होता है,ये बाप बन के ही जानता हूं,
क्योंकि मैं पुरुष हु,और शोषक भी हूँ......

प्रभाकर द्विवेदी "अहिंष्य"

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