अर्थव्यवस्था!

जब हम।किसी सेवा के लिए भुगतान करें और सेवा की गुणवत्ता न रहे तो हमें क्या करना चाहिए?
विद्यालय में उपस्थिति न होने पर हमें फाइन देना होता है,
अगर हम काजू की बर्फी का पैसा दे,और दुकानदार हमे चीनी की बर्फी दे तो हम क्या करते है? दुकानदार का सर खा जाएंगे और उससे अपना पैसा वापस करने को कहेंगे।

मैं सोचता एक ऐसी व्यवस्था जो वास्तव में एक न्यायपूर्ण व्यवस्था होगी।
जैसे-
यदि कोई सड़क टूटी हो जिम्मेदार विभाग की लापरवाही से तो उसका हर्जाना जनता को मिलना चाहिये,
स्वास्थ्यकेन्द्र में गंदगी हो तो उसका हर्जाना आम जनता को मिलना चाहिये,
विद्यालय की स्थिति घटिया हो तो उसका हर्जाना उपभोक्ता को मिलना चाहिये,

क्योंकि यदि हम टैक्स समय से न भरे तो हम अपराधी,
यदि हम ट्रैफिक नियम तोड़े तो हम अपराधी,
यदि हम सरकार का यथोचित भुगतान न करें तो हम अपराधी,

और यदि सरकार से अनियमितता हो कौन अपराधी?
सरकारे रोज असंख्य त्रुटियां करे तो कोई बात नही ये कहाँ का न्याय।
सरकारी मातहत गलतियां कर कर के वेतन पा रहें है ,और आम लोगों का क्या,

ये अन्याय है और असली भ्रस्टाचार है,जो की सरकार है।
इसका जवाब है किसी के पास नही
कत्तई नही।

प्रभाकर द्विवेदी "अहिंष्य"

Comments

Popular posts from this blog

परिचय!

समर्पित प्रेयसी!

आधुनिक अकड़!