प्रतिदान!

न निर्मम है न निर्मल है,
ये मात्र तुम्हारा प्रक्षेपण,
स्वतन्त्र अनिश्चितता,
सुरक्षा का बंदीगृह भी,
ये अन्वेषण जो किये गए,
वसुधा की अग्नि तपस्या है,
यूँ तुमने लौटाया करुणा,
वेदना यहाँ अचम्भित है!

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