प्रियतमा-my love

बस तुम ही तुम हो,
चारो तरफ हो,
आठो पहर हो,
प्यास हो तुम,ज़िन्दगी भी,
बेवजह है,इश्क़ तुमसे,
आवारगी में शामिल तुम्ही हो,
ज़िन्दगी में मोहलत नही है,
बंदिशें है,दुश्वारियां है,
नदियों में बसती लहरे तुम्ही हो,
क्या तुमको पता है,
ये आँखे सिर्फ़ और सिर्फ़ इसलिए खुलती हैं,
कि तुम हो,
सांसे हमारी तुमसे जुडी है,
लफ्ज़ में और ख्वाब में तुम,
तुमसे सुरु मैं तुमपे ही खत्म हूं,
तुम ही बताओ 'मै' कहाँ हु,
ढूंढता हु, मैं खुद को अक्सर!
ये पल देखो ज़ा रहा है,
मुझको कहीं ले जा रहा है,
मालूम नही है,मंज़िल मुझको,
तुम ही बताओ मै कहाँ हु,
भीगी पलके,ढूंढती मुझको,
तुम ही तुम हो मैं कहाँ हू?
खोया हुआ हूं,खो जा रहा हूं,
तुम ही बताओ मैं कहाँ हु!

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