गुरुदेव! सांड!
मुझसे मेरे दोस्त ने पूछा, यार प्रभाकर! तुम करते वरते तो कुछ हो नही,ऊपर से हँसते भी बहुत हो,मस्त रहते हो, क्या बात है,तुम्हे आलस्य में इतना मज़ा क्यों आ रहा है? क्या बात है यार तनिक भी नही सिकन तुम्हारे मुख पर...
मैं देखा जैसे शून्य में, और फिर थोड़ी देर बाद मैंने कहा उससे,"देख भाई मार्च अप्रैल के महीने में मुझे एक गुरु जी मिले,बड़े निश्चिन्त प्रवृत्ति के दिखे मुझको तो मैने भी तुरन्त दीक्षा ले ली उनसे,तबसे मै भी निश्चिन्त रहने लगा,और हा ये बात मैंने किसी को बतायी नही थी किन्तु आज गुरु पूर्णिमा के दिन झूठ बोलना ठीक नही इसलिए तुम्हे बताये दे रहा हु!"
मेरे पत्रकार मित्र ने मुझसे तत्क्षण कहा देखो भाई प्रभाकर मुझे उनसे मिलना ही नही बल्कि दीक्षा भी लेनी इसलिए नेक कार्य में विलंब न करो,क्योंकि मैं भी तंग आ गया हूं गधों की तरह काम करके ,मुझे भी मुक्त होना है तुम्हारी तरह!
मैंने कहा ठीक है,मैं ले चलूंगा तुम्हे गुरु जी के पास,किन्तु एक शर्त है मित्र कि तुम घबराओगे नही,बिल्कुल नही घबराओगे क्योंकि डरे कि मरे,गुरु जी हिमालय से भी खतरनाक स्थान पर रहते हैं,
बोलो..रिस्क लेना चाहोगे,गुरु जी से मिलने के लिए,
ये भी हो सकता है कि तुम्हे लोग पागल कहे,लेकिन डरना नही, बस डटे रहना दीक्षा मिल जायेगी!
खैर अगले दिन का समय तय हुआ गुरु जी से मिलने का।
अगले दिन बरगदवा तिराहे पर गुरु जी ,बीचोबीच बैठे थे,
मैंने भी हाईवे के बीचोबीच गुरु जी के साथ बैठने का निश्चय किया।
मेरा मित्र अमित वहां बौठने से भयभीत होता रहा लेकिन प्रतिज्ञा कर ली थी कल उसने,इसलिए चाहे मजबूरी कहे या जिज्ञासा वो साथ ही साथ था मेरे....
मैने उसकी स्थिति को भांपते हुए उससे कहा,"का है बे काहें पगला रहे हो,डरो मत,बिलकुल डरो मत,हमारे गुरु जी को देखो कैसे इत्मीनान से बैठे है हाईवे के बिलकुल बीचोबीच,तुम नाहक डर रहे हो,डरो मत बल्कि आनन्दित होओ, किसी गाड़ी वाड़ी से मत डरो कोई चूँ तक नही कहेगा।"
मैं झट से गुरु जी का पैर दबाना प्रारंभ किया और कहा ,"गुरु जी! ये अमित हैं, आपसे दीक्षा लेना चाहते है,अतः आप से ये कुछ प्रश्न पुछेंगे आप इनके प्रश्नों का उत्तर दीजिये बस!यही विनती है प्रभु!"
मैं गुरु जी का पैर दबाने में रत था और अमित ने प्रश्न दागने प्रारंभ किये।
अमित: गुरु जी आपको डर नही लगता सड़क के बीचोबीच समाधि के मुद्रा में बैठे है?
गुरु जी:क्या बे! पगलाये हो क्या आजकल हमारी सरकार है प्रदेश में बे,और मुख्यमंत्री भी हमरे शहर का है,किसकी हिम्मत है बे जो हमको बोलेगा,हमरी रक्षा के लिए ,रक्षा समझते हो न,के लिए एक विशेष ऑर्मी तैयार की गयी है।
अमित:अच्छा गुरु जी,ये जो बगल में दरोगा जी है खड़े आप नही डरते इनसे,इनको देख के मेरी तो फट रही है
गुरु जी:का है बे वो तो पहले से ही फटा हुआ है
और सुनो ई तुम इस दरोगा को कह रहे हो,अर्रे... अगर..(अंगड़ाई लेते हुए मुझे इशारा करते हुए का कहते हैं उसको जिसको प्रदेश का सारा दरोगा लोग,सारा पुलिस लोग सलाम दागता है..)
हाँ हाँ गुरु DGP ..मैंने श्रद्धा से कहा
बिलकुल सही पकड़े प्रभाकर!
गुरु जी ने कहा अगर डी जी पी भी आ जाये तो हमारा कुछ बिगाड़ नही सकता समझे न अमित,
त ई दरोगा क्या चीज है बे ये दिन भर खड़ा रहता है,यहीं अपने दल बल के साथ,
और मैं यही समाधिस्त रहता हूं,
हमरे कुछ भाई बहन है मनीराम रेलवे स्टेशन के सामने NH 29 पे बिलकुल बीचोबीच पार्टी करते हैं,कोई कुछ नही बोलता।
आजकल हमरी सरकार है हम बेख़ौफ़ घूमते है जिसको चाहे दौड़ा के मारे कोई हमरा कुछ नही उखाड़ सकता समझे।
अगर मैं खड़ा हो जाऊं न तो हज़ारो हज़ारो गाड़ियों की कतार खड़ी हो जाती है,
एम्बुलेंस-वोम्बुलेन्स को कुछ नही समझते हम कोई मरता है तो मरने दो साले को लेकिन आजकल हम बेख़ौफ़ है कोई खरोंच नही लगा सकता है मुझे,और अगर दाढ़ी वालों से खरोंच लग जाये तो समझो कि कयामत आ जायेगी....
इसलिए तुम किसी शहर में देख लो हमारी मीटिंग बीच सड़क पर ही होती है आजकल हमरा संगठन किसी से डरता नही ,जिसको चाहे दौड़ा कर मारू,जब जी चाहे जाम लगा दू,समझे न और तो और आजकल हम गुंडागर्दी आलस्य की दीक्षा भी देते है,
देखो हमारा चेला कितना मस्त है आजकल.....
अमित भी मस्त हो गया,लगा झूम के कहने जय हो गुरु जी जय हो गुरु जी की....
मैं देखा जैसे शून्य में, और फिर थोड़ी देर बाद मैंने कहा उससे,"देख भाई मार्च अप्रैल के महीने में मुझे एक गुरु जी मिले,बड़े निश्चिन्त प्रवृत्ति के दिखे मुझको तो मैने भी तुरन्त दीक्षा ले ली उनसे,तबसे मै भी निश्चिन्त रहने लगा,और हा ये बात मैंने किसी को बतायी नही थी किन्तु आज गुरु पूर्णिमा के दिन झूठ बोलना ठीक नही इसलिए तुम्हे बताये दे रहा हु!"
मेरे पत्रकार मित्र ने मुझसे तत्क्षण कहा देखो भाई प्रभाकर मुझे उनसे मिलना ही नही बल्कि दीक्षा भी लेनी इसलिए नेक कार्य में विलंब न करो,क्योंकि मैं भी तंग आ गया हूं गधों की तरह काम करके ,मुझे भी मुक्त होना है तुम्हारी तरह!
मैंने कहा ठीक है,मैं ले चलूंगा तुम्हे गुरु जी के पास,किन्तु एक शर्त है मित्र कि तुम घबराओगे नही,बिल्कुल नही घबराओगे क्योंकि डरे कि मरे,गुरु जी हिमालय से भी खतरनाक स्थान पर रहते हैं,
बोलो..रिस्क लेना चाहोगे,गुरु जी से मिलने के लिए,
ये भी हो सकता है कि तुम्हे लोग पागल कहे,लेकिन डरना नही, बस डटे रहना दीक्षा मिल जायेगी!
खैर अगले दिन का समय तय हुआ गुरु जी से मिलने का।
अगले दिन बरगदवा तिराहे पर गुरु जी ,बीचोबीच बैठे थे,
मैंने भी हाईवे के बीचोबीच गुरु जी के साथ बैठने का निश्चय किया।
मेरा मित्र अमित वहां बौठने से भयभीत होता रहा लेकिन प्रतिज्ञा कर ली थी कल उसने,इसलिए चाहे मजबूरी कहे या जिज्ञासा वो साथ ही साथ था मेरे....
मैने उसकी स्थिति को भांपते हुए उससे कहा,"का है बे काहें पगला रहे हो,डरो मत,बिलकुल डरो मत,हमारे गुरु जी को देखो कैसे इत्मीनान से बैठे है हाईवे के बिलकुल बीचोबीच,तुम नाहक डर रहे हो,डरो मत बल्कि आनन्दित होओ, किसी गाड़ी वाड़ी से मत डरो कोई चूँ तक नही कहेगा।"
मैं झट से गुरु जी का पैर दबाना प्रारंभ किया और कहा ,"गुरु जी! ये अमित हैं, आपसे दीक्षा लेना चाहते है,अतः आप से ये कुछ प्रश्न पुछेंगे आप इनके प्रश्नों का उत्तर दीजिये बस!यही विनती है प्रभु!"
मैं गुरु जी का पैर दबाने में रत था और अमित ने प्रश्न दागने प्रारंभ किये।
अमित: गुरु जी आपको डर नही लगता सड़क के बीचोबीच समाधि के मुद्रा में बैठे है?
गुरु जी:क्या बे! पगलाये हो क्या आजकल हमारी सरकार है प्रदेश में बे,और मुख्यमंत्री भी हमरे शहर का है,किसकी हिम्मत है बे जो हमको बोलेगा,हमरी रक्षा के लिए ,रक्षा समझते हो न,के लिए एक विशेष ऑर्मी तैयार की गयी है।
अमित:अच्छा गुरु जी,ये जो बगल में दरोगा जी है खड़े आप नही डरते इनसे,इनको देख के मेरी तो फट रही है
गुरु जी:का है बे वो तो पहले से ही फटा हुआ है
और सुनो ई तुम इस दरोगा को कह रहे हो,अर्रे... अगर..(अंगड़ाई लेते हुए मुझे इशारा करते हुए का कहते हैं उसको जिसको प्रदेश का सारा दरोगा लोग,सारा पुलिस लोग सलाम दागता है..)
हाँ हाँ गुरु DGP ..मैंने श्रद्धा से कहा
बिलकुल सही पकड़े प्रभाकर!
गुरु जी ने कहा अगर डी जी पी भी आ जाये तो हमारा कुछ बिगाड़ नही सकता समझे न अमित,
त ई दरोगा क्या चीज है बे ये दिन भर खड़ा रहता है,यहीं अपने दल बल के साथ,
और मैं यही समाधिस्त रहता हूं,
हमरे कुछ भाई बहन है मनीराम रेलवे स्टेशन के सामने NH 29 पे बिलकुल बीचोबीच पार्टी करते हैं,कोई कुछ नही बोलता।
आजकल हमरी सरकार है हम बेख़ौफ़ घूमते है जिसको चाहे दौड़ा के मारे कोई हमरा कुछ नही उखाड़ सकता समझे।
अगर मैं खड़ा हो जाऊं न तो हज़ारो हज़ारो गाड़ियों की कतार खड़ी हो जाती है,
एम्बुलेंस-वोम्बुलेन्स को कुछ नही समझते हम कोई मरता है तो मरने दो साले को लेकिन आजकल हम बेख़ौफ़ है कोई खरोंच नही लगा सकता है मुझे,और अगर दाढ़ी वालों से खरोंच लग जाये तो समझो कि कयामत आ जायेगी....
इसलिए तुम किसी शहर में देख लो हमारी मीटिंग बीच सड़क पर ही होती है आजकल हमरा संगठन किसी से डरता नही ,जिसको चाहे दौड़ा कर मारू,जब जी चाहे जाम लगा दू,समझे न और तो और आजकल हम गुंडागर्दी आलस्य की दीक्षा भी देते है,
देखो हमारा चेला कितना मस्त है आजकल.....
अमित भी मस्त हो गया,लगा झूम के कहने जय हो गुरु जी जय हो गुरु जी की....
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