आतंकी!

जो बेमौत मारे जा रहे है,तुम्हारी ज़िद से!
उसका हिसाब तुम्हारे पास नही होगा,
कुछ ऐसी कवायद करो की इतमिनाम रहे
तुम्हे भी!
तुम जिस ज़िद को पाल कर गुरुर में हो,
कयामत के वक़्त तक सबकी मौत मरोगे तुम!
सबकी ख्वाहिशे,ज़िन्दगी सबकी, गुज़रेगी
तुम्हारी सड़ी हुई हड्डियों से!
कुछ तो तय है,कि तुम्हारी ठेकेदारी तुम्हें
तुम्हारी नाक रगड़ने को मज़बूर करेगी!

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