मृत्यु(Death)
मृत्यु तुम्हे ले जाएगी,
ऐसी दुनिया में जहाँ न कोई हिन्दू,
और न मुसलमाँ सिख्ख ईसाई,
वहां समझ आएगी तुमको,
नही वसुंधरा का धर्म कोई पर मानवता से,
वहाँ भास ये तुमको होगा,
नफरत में तुमने इस धरती,
को भस्म किया बस भस्म किया,
प्रेम तुम्हे होगा ज्ञात,
किन्तु उस वक़्त बहुत तुम दूर
रहोगे इस जीवन से,
फिर तरसेगी रूह तुम्हारी,
फिर तड़पेगी रूह तुम्हारी,
कैसे की एक शब्द "धर्म" ने
तुमको तुम्हारी जाति का
कातिल बना दिया!
ऐसी दुनिया में जहाँ न कोई हिन्दू,
और न मुसलमाँ सिख्ख ईसाई,
वहां समझ आएगी तुमको,
नही वसुंधरा का धर्म कोई पर मानवता से,
वहाँ भास ये तुमको होगा,
नफरत में तुमने इस धरती,
को भस्म किया बस भस्म किया,
प्रेम तुम्हे होगा ज्ञात,
किन्तु उस वक़्त बहुत तुम दूर
रहोगे इस जीवन से,
फिर तरसेगी रूह तुम्हारी,
फिर तड़पेगी रूह तुम्हारी,
कैसे की एक शब्द "धर्म" ने
तुमको तुम्हारी जाति का
कातिल बना दिया!
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