तूफ़ान के बाद!

आज फिर तूफान आया!
मातम छाया! किन्तु कल फिर
फुर्सत में होगी ज़िन्दगी!
पुष्प खिलेंगे बसन्त के
खेत लहल्हायेंगे जीवन में

सारे गीले-शिक़वे फिर...
फिर दूर होंगे जीवन से..
तूफ़ानी बवंडर की आयु नही है थोड़ी भी!

हा किन्तु ये बवंडर तुम्हे
मज़बूत स्तम्भ बनाने आयी थी!
मज़बूत  करो खुद को!
अभी घोर तपस्या शेष ही है!

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