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समर्पित प्रेयसी!
कहना है बहुत कुछ तुम से मगर कैसे कहूं कह नहीं सकती मैं मिलना चाहती हूं तुम्हें भरना चाहती हूं बाहों में इसका मतलब वासना कतई नहीं मैं स्पर्श करना चाहती हूं तुम्हारी आत्मा को टटोलना चाहती हूं तुम्हारे मन को मेरे लिए उसमें अथाह प्रेम है कि नहीं मैं चाहती हूं तुम अपने प्रेम से मेरे आंखों के आंसुओं को सोख लो सुखे वीरान पड़े जीवन में प्रेम की बारिश कर दो मेरा अथाह समर्पण है उस पुरुष के लिए जिसे मैं हृदय से प्रेम करती हूं उसके सिवा कोई स्पर्श नहीं कर सकता जन्मो जन्मांतर इंतजार कर सकती हूं मुझे सिर्फ तुम ही चाहिए जिसके सामने सहज महसूस कर सकूं उतार फेंकू अपने मुखौटे रो सकू जार जार हंस सकू खुल के बेझिझक सर रख सकूं कांधे पर मुझे सिर्फ तुम्हारी चाहत है माथे की तरह चूम सकू तुम्हारे चरणों को भी बस तुम्हारे स्पर्श मात्र से पुलकित हो जाए मन और कर दूं समर्पण पूर्ण हो अस्तित्व मेर...
आधुनिक अकड़!
जब मेरी शादी हुई थी तो मेरी उम्र महज 22 साल थी पतिदेव की उम्र 33 साल थी, शादी के शुरुवाती दिन में हमारे बीच सब अच्छा था, दिन में कितना भी झगड़ा हो लेकिन रात में पति को करीब पता देख हम दोनो भूल कर एक हो जाते पहले तो मैंने घर वालों को मना किया क्यों की पति की उम्र ज्यादा थी पर घर वाले नहीं माने समय के साथ रिश्तों में खटास आती है जो मेरे साथ भी होने लगा अब क्यों की मैं सिर्फ 22 की थी तो खाली होने के बाद मैं अपनी सहेलियों से बात करती और जोर जोर से हंसती थी ये बात मेरी सास को बिलकुल पसंद नहीं थी उन्होंने बोला बेटा नया नया शादी हुआ है ससुर हैं जेठ हैं इनका लिहाज किया करो लेकिन मैं आदत से मजबूर थी समय के साथ साथ मेरी सास मुझसे नफरत करने लगी और मुझे भी इसकी कोई परवाह नहीं थी शादी के 1 साल बाद मेरे पति को काम से विदेश जाना हुआ जिसके लिए मैने भी बोला, तो उन्होंने बोला की मात्र 2 महीने के लिए जाना है कम्पनी सिर्फ मेरा पैसा देगी लेकिन मुझे तो बस जाना था इसी बात को लेके हम दोनो में अनबन हो गई और मैं अपने मायके आगयी फिर रोज हमारी लड़ाई इसी बात पर ...

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