सनक से संकल्प!

इतिहास में कोई व्यक्ति जो विशिष्ट रहा हो,सनक के बगैर ये असंभव है।अब यदि आप सनकी है तो प्रथमतः ईश्वर को धन्यवाद ज्ञापित करिये।द्वितीयतः आप लोगों का प्रतियुत्तर देना बंद करिये;अर्थात उद्दंडतापूर्वक रहना बन्द करके अपनी सनक में ही रहना सीखिये एवं प्रसन्नचित रहिये अपनी सनक में।

जब आप पूर्ण सनकी हो जाये
एक विशिष्ट संकल्प जागृत होगा,
विशुद्ध सनक,इसी को सनकल्पगीत बनाइये एवं अपने आपका,होने के मर्म को जानिये।

फिर आप स्वयम्प्रकाश हो जाएंगे।
पूरी दुनिया आप भ्रमण कर लेंगे एक झटके में
क्योंकि अब आप योगस्थः हो गए है।

असम्भव विलीन होगा एवं सम्भव की संभावनाएं और प्रगाढ़ हो जाएंगी।

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