भारती..१

मैं अपने अंतिम सांस तक
विश्व की समृद्धि लिखता रहूंगा
आसक्ति वश नही,कर्तव्य,निष्काम कर्तव्य वश।।

और पूरे विश्व का मुखिया
मेरा भारत है,ऐसा सनातन काल से है!
चंद नफरती, और चोरों को
भी सब त्याग भारत के मुखिया
बनने में सहयोग करना होगा।।

भारत और भ्रष्टाचार का
दूर-दूर तक कोई नाता नही,
जो छिटपुट लोग है,उन्हें भी बोध होगा
वो भी सुधरेंगे!






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