कैवल्यकामी!

यात्रा करते-करते अब इस बिंदु पर हूं कि यहाँ से मात्र एक क्षलाँग, और मुक्त! मोक्ष नगरी में गया!
किन्तु नही ये क्षलाँग लगेगी नही,इतनी शीघ्रता नही करनी है,अभी तुम सब को यहाँ लाना है,सबके साथ क्षलाँग लगेगी!
अब तुम्हे रोगों से मुक्ति देने हेतु अनन्त पुनरावृत्ति हो,फर्क नही पड़ता।
किन्तु क्षलाँग तो तुम्हारे संग ही लगेगी। ये निश्चित है...
देखते है तुम्हारे "मय" में कितना जोर है!

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