मेरे बाद!

सम्भव है कि मेरे होने तक ही,अन्यथा मेरे बाद तुम भी मेरे जैसे ही हो जाओगे! मैं तुम्हारे अन्तस् में हूँ तुम बस आँखे बंद नही किये नही तो मिल जाते मुझसे! और मैं यूँही नही तुम्हारे पास आता हूं,तुम्हे ज्ञात हो या न हो किन्तु तुम्हारे अन्तस् की पुकार पर ही मैं तुम्हारे समक्ष होता हूँ!
मेरा कोई स्वार्थ नही है अपितु मैं तुम्हारे स्व-अर्थ को जागृति देने हेतु ही आता हूँ!
मेरे जाने के बाद भी मैं रहूंगा,तुम्हारे साथ! तुम्हारे प्रत्येक अवस्था में!

Comments

Unknown said…
अति सुन्दर

Prabhakar Dubey said…
धन्यवाद अपरिचित पाठक!

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