रूदन( The beauty of weeping)

रूदन बहुत सुंदर प्रक्रिया है,सारे घाव भरने के,लेकिन शर्त ये है कि रूदन पूर्ण मनोयोग से होना चाहिए।
इस समग्र सृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति समस्याओं से ग्रस्त है,विभिन्न प्रकार की समस्याएं है।
और निःसंदेह प्रत्येक समस्याओं का समाधान भी,इसलिए हमें समस्याओं एवं उनके समाधान से स्वयं की आत्मा को चोटिल नही करना चाहिए क्योंकि एक तथ्य निश्चित है कि समस्याओ का कभी अंत नही है अर्थात समस्याओं की एक उत्तरोतर सृंखला है।
हमे आवश्यकता है कि हम अपनी आत्मा को स्वस्थ रखे उसके लिए हमे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा,और ये दृष्टिकोण अभ्यास से उत्तम होता जाता है,और जैसे जैसे दृष्टिकोण परिमार्जित होता जाता है हमारा चित्त भार मुक्त होता जाता है,वर्षों की ग्रन्थियां आहिस्ता-आहिस्ता मुक्त होती जाती हैं।
और धीरे-धीरे हम आध्यत्मिक आयामों की सुंदर यात्रा पर निकलना प्रारम्भ कर देते है;इस यात्रा से हमारा व्यक्तित्व विशद होता जाता है,हमें ज्ञात होता है कि हम इस समग्र व्यवस्था के एक अंग है,पहली दफा हमें हमारी जाति का स्मरण होता है और इस स्मरण होने के पश्चात हम विभिन्न सांसारिक सीमाओं में रहकर भी उनसे मुक्त रहते हैं,बिल्कुल रंगमंच के पात्रों की तरह।
इसी सहज अवस्था को समाधि कहते है।इस अवस्था मे रूदन इतना सुन्दर एवं सौम्य होता है कि रूदन एक श्रद्धांजलि होती है,हमारा रोम रोम अनुग्रह से भरा रहता है,हम प्रत्येक शिकायत से मुक्त हो जाते हैं,एवं एक सम्यक दृष्टि हमे प्राप्त होती है जिससे हम इस संसार के प्रत्येक अंश के प्रति समभाव से युक्त हो जाते है।और विभिन्न वासनाओं से मुक्त।

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