तेरी-गलियाँ.. the street of love

मेरे इश्क़ की शुरुआत तुम्हारे गलियों से हुई,
और तुम्हारे गलियों का प्रत्येक चक्कर मुझे मुझसे मिलाता है,
मैं देर अबेर चोरी छिपके तुम्हारे गलियारों से गुजर लिया करता हूँ!
और एक-एक क्षण जैसे-जैसे बीतता जा रहा हूँ मै तुम्हारे होने,न होने से दूर निकलता जा रहा हूँ;
और तुम एक-एक क्षण मेरे अंदर गहराते जा रहे हो!
मैं आज भी उन गलियों से गुजरता हूँ,
क्योंकि जीने की ज़िद पैदा होती है वहाँ से गुजरने में मुझमे!
मुझे पवित्र होने का मार्ग प्रदान करती है,वो गलियां।
मुझमे जो तुम हो उससे बात कराती है वो गलियां,
मैं गलीयों का बंजारा हुआ ये बात और हसीन थी!
मसलन अब वो गलियां नही,
एक मुकम्मल रास्ता है जो मुझे तुमसे
अखण्ड करता है,और उसके लिए
उस योगेश्वर को धन्यवाद! कोटि कोटि धन्यवाद!
   न तुम्हे खोने का डर
    न तुम्हे पाने की ख्वाहिशें,
      तुम खिलौने नही हो रूह हो,
         बस तुम्हे इश्क़ करने का हक़ है मुझे!
            तुम्हे महसूस करने का हक़ है मुझे,
              औऱ इसके लिए मुझे ....
                 किसी की आज्ञा लेने की आवश्यकता नही!

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